मुंबई: महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन को लेकर बनाया गया नया कानून अब लागू होने जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कानून को 1 अगस्त 2026 से प्रभावी किए जाने की अधिसूचना जारी हो चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद इसे 30 जुलाई को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसलिए 28 अगस्त से लागू होने की जानकारी को अपडेट करना जरूरी है।
विधानसभा और विधान परिषद से पारित महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 का उद्देश्य जबरन, धोखाधड़ी, प्रलोभन, दबाव या शादी के नाम पर कराए जाने वाले गैरकानूनी धर्म परिवर्तन को रोकना है। कानून में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया रखी गई है।
स्वेच्छा से धर्म बदलने पर 60 दिन पहले देनी होगी सूचना
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित सक्षम प्राधिकारी यानी जिला मजिस्ट्रेट या सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी को कम से कम 60 दिन पहले सूचना/आवेदन देना होगा। कानून में धर्म परिवर्तन के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का प्रावधान है।
जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन पर कड़ी सजा
कानून में बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, गलत जानकारी, प्रलोभन या शादी से जुड़े धोखे के जरिए धर्म परिवर्तन को अपराध बनाया गया है। ऐसे मामलों में सात साल तक की जेल हो सकती है और अपराध को संज्ञेय तथा गैर-जमानती बनाया गया है। बार-बार अपराध करने पर सजा 10 साल तक बढ़ सकती है।
नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति से जुड़े मामलों में कानून और कड़े दंड का प्रावधान करता है। विधेयक में ऐसे मामलों में सात साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर भी कानून की नजर
कानून में शादी से जुड़े धर्म परिवर्तन को लेकर भी विशेष प्रावधान हैं। यदि शादी के बहाने गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
यही वजह है कि इस कानून को लेकर नागरिक अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी उठे हैं। आलोचकों का तर्क है कि 60 दिन पहले सूचना देने जैसी व्यवस्था निजी जीवन और अंतरधार्मिक संबंधों में सरकारी दखल की आशंका पैदा कर सकती है। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन या अंतरधार्मिक विवाह पर रोक लगाना नहीं, बल्कि जबरदस्ती और धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी कड़ा प्रावधान
सामूहिक रूप से गैरकानूनी धर्म परिवर्तन कराने पर भी कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में सात साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए सजा और अधिक कड़ी है।
महाराष्ट्र बना ऐसा कानून लागू करने वाला 13वां राज्य
महाराष्ट्र अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला कानून लागू है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक महाराष्ट्र ऐसा कानून लागू करने वाला देश का 13वां राज्य बना है।
यानी सबसे बड़ा बदलाव यह है कि महाराष्ट्र में स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए भी पहले से प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जबकि जबरदस्ती, धोखे, प्रलोभन या शादी के जरिए कराए गए गैरकानूनी धर्म परिवर्तन पर कड़ी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान है।
