सिकंदराबाद स्थित सेना की छावनी से हथियारों और भारी मात्रा में गोला-बारूद की चोरी के मामले में हैदराबाद पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने चोरी का पूरा जखीरा बरामद कर लिया है और मामले में सेना के एक रिटायर्ड हवलदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की पहचान 37 वर्षीय उप्पुथोल्ला मल्लेश के रूप में की है, जो मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में तैनात था और 30 जून 2026 को सेवा से रिटायर हुआ था।
क्या चोरी हुआ था
बोलारम स्थित मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन के कोट और मैगजीन रूम से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद चोरी हुए थे। पुलिस के अनुसार चोरी की गई सामग्री में चार AK-203 राइफलें, एक INSAS राइफल, सात पिस्तौलें उनकी मैगजीन सहित, एक पैसिव नाइट-विज़न दूरबीन और करीब 1,900 राउंड गोला-बारूद शामिल था, जिसमें AK-203 व INSAS के कारतूस, ट्रेसर राउंड और ब्लैंक गोला-बारूद भी था। घटना की जानकारी मिलते ही सिकंदराबाद स्थित एक लेफ्टिनेंट कर्नल की शिकायत पर बोलारम पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।
जांच में कैसे-कैसे एजेंसियां जुड़ीं
आर्मरी तक पहुंच बेहद सीमित होने के कारण जांचकर्ताओं को शुरू से ही किसी अंदरूनी व्यक्ति के शामिल होने का शक था। जांच के लिए मिलिट्री इंटेलिजेंस, मलकाजगिरि पुलिस, विशेष अभियान दल (SOT) और हैदराबाद सिटी टास्क फोर्स को लगाया गया। जिन लोगों की आर्मरी तक सीधी या परोक्ष पहुंच थी—जैसे आर्मरी स्टाफ, QRT सदस्य, आउटसोर्स कर्मचारी, हाल में रिटायर या बर्खास्त हुए जवान—उन सभी को जांच के दायरे में लिया गया। जांचकर्ताओं ने तकनीकी विश्लेषण के तहत करीब 8.5 लाख मोबाइल नंबरों को शॉर्टलिस्ट किया और CCTV फुटेज, मोबाइल फोरेंसिक, फिंगरप्रिंट व ट्रैकिंग डॉग की मदद ली। जांच के दौरान ड्रग नेटवर्क, जासूसी और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से संभावित संबंध की भी पड़ताल की गई, हालांकि इस दिशा में कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया।
शक की सुई मल्लेश पर टिकी
लगभग एक सप्ताह की जांच के बाद संदेह हाल ही में सेवा से हटाए गए दो पूर्व जवानों पर केंद्रित हुआ। इनमें से एक से पूछताछ के बाद शक दूर हो गया, जबकि दूसरे, उप्पुथोल्ला मल्लेश की गतिविधियां और बयान जांचकर्ताओं को संदिग्ध लगे। पुलिस के अनुसार, उसके मोबाइल फोन के विश्लेषण से पता चला कि उसने चैट और कॉल रिकॉर्ड डिलीट किए थे, जिससे शक और गहरा गया।
पुलिस के अनुसार वारदात कैसे अंजाम दी गई
पुलिस के मुताबिक, मल्लेश ने कथित तौर पर 27 से 29 अगस्त के बीच आर्मरी की रेकी की, सुरक्षा व्यवस्था, CCTV कवरेज और लाइटिंग का अध्ययन किया। 30-31 अगस्त की रात वह कथित तौर पर बालाजी नगर स्थित अपने घर से निकलकर आर्मरी क्षेत्र में घुसा, ताला तोड़कर हथियार और गोला-बारूद निकाला और मोटरसाइकिल पर लादकर कुछ दूरी पर एक मंदिर के पास छिपा दिया। CCTV फुटेज में उसे सुबह करीब 4:34 बजे घर लौटते देखा गया। इसके बाद उसने कथित तौर पर सामान अपनी सफेद मारुति ब्रेज़ा कार में रखकर अचंपेट की ओर प्रस्थान किया और टोल प्लाजा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया।
पुलिस के अनुसार, यात्रा के दौरान उसने कुछ सवारियों को भी बिठाया — बताया जा रहा है कि रिटायरमेंट के बाद वह टैक्सी चलाकर गुजारा कर रहा था, और इससे यह आभास भी बनता था कि वह किसी सामान्य काम से यात्रा पर निकला है। जैसे-जैसे उस पर शक गहराया, उसने 6 सितंबर के आसपास घबराकर सामान दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। पुलिस के बार-बार बुलाने पर भी वह लंबे समय तक पेश नहीं हुआ। आखिरकार 10 सितंबर को पूछताछ में उसने अपराध कबूल कर लिया, जिसके बाद डीसीपी की अगुवाई में हैदराबाद टास्क फोर्स की टीम ने चोरी का पूरा सामान बरामद कर लिया।
डीजीपी ने बताई वजह
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद के अनुसार, मल्लेश ने 2010 में सेना जॉइन की थी और उसे 30 जून 2026 को रिटायर कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक उसकी नाराजगी असमय रिटायरमेंट को लेकर थी। डीजीपी ने यह भी कहा कि फिलहाल मल्लेश के हथियार तस्करों से किसी सीधे संबंध की संभावना कम नजर आती है, हालांकि सेना के अधिकारी इस पहलू की आगे जांच करेंगे। पुलिस के मुताबिक जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद चुराने के पीछे असल मकसद क्या था और क्या इस पूरी वारदात में मल्लेश अकेला शामिल था या कोई और भी।

