Gen-Z: विरोध-प्रदर्शन की बदली भाषा, इंकलाब-जिंदाबाद नहीं, अब जेन-जी के मीम-वन लाइनर व स्लैंग का है ट्रेंड

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Gen-Z: विरोध-प्रदर्शन की बदली भाषा, इंकलाब-जिंदाबाद नहीं, अब जेन-जी के मीम-वन लाइनर व स्लैंग का है ट्रेंड

आजादी की लड़ाई से अब तक विरोध-प्रदर्शनों की पहचान रहे इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे जेन जी की नई भाषा ने बदल दिए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन में ऑल इज नॉट वेल, जल्दी इस्तीफा दें, सुबह पनवेल निकलना है और रात को फीफा, सुबह इस्तीफा… लिखे मीम, वन लाइनर व्यंग्य और इंटरनेट स्लैंग लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

एएमयू के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पितबास प्रधान का कहना है कि अब यही भाषा नई पीढ़ी की पहचान बन रही है। वहीं, धरना-प्रदर्शन में शामिल अलीगढ़ के कृष्णा चौधरी का कहना है कि जेन-जी का उद्देश्य केवल अपनी मांग रखना नहीं बल्कि ऐसा संदेश देना है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो सके और हर वर्ग के लोगों का ध्यान खींच सके।

पेपर लीक के विरोध में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को और धारदार बनाने के लिए जेन जी फिल्मों के संवाद, वायरल ट्रेंड और धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भों को जोड़कर ऐसे मीम, स्लैंग और वन लाइनर बना रहे हैं जो सभी वर्गो को जोड़ रहे हैं। पुलिस के लाठीचार्ज के बीच पोस्टर और प्ले कार्ड पर लिखे मीम, वन लाइनर व्यंग्य और स्लैंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषा विभाग के निदेशक प्रोफेसर एमजे वारसी बताते हैं कि सोशल मीडिया ने विरोध की भाषा को छोटा और दृश्यात्मक बना दिया है। हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण वाले स्लैंग जेन-जी की नई भाषा है। यह अब महानगरों तक सीमित नहीं है बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी धड़ल्ले से उपयोग हो रहे हैं। मीम के जरिये कठिन विषयों पर भी युवा अपनी बात आसानी से लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

हर पीढ़ी बोलचाल में अपनी छाप छोड़ती है
प्रोफेसर पितबास प्रधान का कहना है कि मीडिया और संचार का स्वरूप लगातार बदल रहा है। पहले नारे और भाषण मुख्य माध्यम होते थे। जेन जी वही भावनाएं फिल्मी डायलॉग, मीम और स्लैंग के जरिये व्यक्त कर रहे हैं। यह भाषा उनके लिए सहज और आत्मीय है। हिंदी में अंग्रेजी स्लैंग का मिश्रण भी भाषा के स्वाभाविक विकास का ही हिस्सा है। हर पीढ़ी अपनी बोलचाल में अपने समय की छाप छोड़ती है। आगे चलकर मीम की भाषा राजनीतिक संवाद का अहम हिस्सा बन सकती है। क्योंकि, इसमें कम शब्दों में बात तेजी से लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

 

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