हाथरस में गोवंश में लंपी जैसी बीमारी के मामले और पशुओं की मौत की खबरों के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। बृहस्पतिवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) पीएन दीक्षित ने पशुपालन विभाग की टीम के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने बीमार पशुओं की स्थिति देखी, पशुपालकों से बीमारी और इलाज की जानकारी ली तथा स्वस्थ पशुओं के टीकाकरण के निर्देश दिए।
प्रशासन की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जिले के कई गांवों में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज जैसे लक्षण सामने आने और पशुओं की मौत की शिकायतें सामने आई हैं। इससे पहले पशु चिकित्सा विभाग ने भी हाथरस के सादाबाद क्षेत्र में 13 गोवंश में लंपी वायरस की पुष्टि होने की जानकारी दी थी। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही सभी पशु मौतों को लंपी से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग मामलों में नहीं हुई है।
सीडीओ ने गांव पहुंचकर पशुपालकों से ली जानकारी
सीडीओ पीएन दीक्षित पशुपालन विभाग की टीम के साथ प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने पशुपालकों से बीमार पशुओं के लक्षण, इलाज और विभाग से मिल रही मदद के बारे में जानकारी ली।
गांव पोदा में पशुपालक राकेश कुमार की दुधारू गाय गंभीर रूप से बीमार मिली। राकेश ने अधिकारियों को बताया कि पशुपालन विभाग का टोल फ्री नंबर काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण बीमार पशु की सूचना विभाग तक पहुंचाने में परेशानी हुई और उन्हें निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ा।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि बीमारी के बाद दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। निजी चिकित्सकों से इलाज कराने के कारण पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
पशु चिकित्सा टीम ने संक्रमित पशुओं की जांच की
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय कुमार के नेतृत्व में पहुंची पशुपालन विभाग की टीम ने बीमार पशुओं की जांच की और उन्हें दवाएं दीं। सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वस्थ पशुओं का तत्काल टीकाकरण कराया जाए और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाई जाएं।
पशुपालकों से कहा गया कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा टीम को सूचना दें। संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना भी संक्रमण नियंत्रण का महत्वपूर्ण उपाय है। लंपी स्किन डिजीज मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे वाहक कीटों के माध्यम से फैल सकती है।
हाथरस में पहले ही सामने आ चुके हैं लंपी के मामले
हाथरस में अगस्त से ही गोवंश में लंपी स्किन डिजीज को लेकर चिंता बनी हुई है। अगस्त में कजरौठी, रमचेला और गिजरौला समेत कई गांवों में बीमारी के मामले सामने आने की रिपोर्ट थी।
7 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पशु चिकित्सा विभाग ने हाथरस जिले में 13 गोवंश में लंपी वायरस की पुष्टि की थी और इनका उपचार चल रहा था। सादाबाद, बिसावर, सिकंदराराऊ, मुरसान और सासनी क्षेत्रों के कई गांवों में भी पशुओं में बीमारी के लक्षण बताए गए थे।
इसके बाद 10 सितंबर को पांच गांवों में सात गोवंश की मौत की खबर सामने आई। ग्रामीणों ने इन मौतों को लंपी से जोड़कर चिंता जताई थी, जबकि पशु चिकित्सा विभाग ने जांच के बाद ही मौतों का कारण स्पष्ट होने की बात कही थी। विभाग ने प्रभावित गांवों में टीकाकरण और उपचार के लिए टीमें भेजने की जानकारी दी थी।
गिजरौला की अस्थायी गोशाला का भी निरीक्षण
सीडीओ ने ग्राम पंचायत कजरौठी के गिजरौला स्थित अस्थायी गोशाला का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने गोशाला में साफ-सफाई, गोवंश की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अधिकारियों को गोशाला में गोवंश की नियमित निगरानी करने तथा बीमारी के लक्षण वाले पशुओं पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए। हालिया निरीक्षण में प्रशासन ने गोशाला में आइसोलेशन वार्ड को पूरा करने और गोवंश के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
फिलहाल प्रशासन और पशुपालन विभाग का फोकस प्रभावित गांवों में बीमार पशुओं के उपचार, स्वस्थ पशुओं के टीकाकरण और संक्रमण को दूसरे पशुओं तक फैलने से रोकने पर है।

