वडोदरा। गुजरात के वडोदरा से रेबीज का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। भायली इलाके में एक युवक की हालत अचानक बिगड़ गई और वह खुद को काटने लगा तथा आसपास मौजूद लोगों पर हमला करने की कोशिश करने लगा। परिजनों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह उसे काबू में किया और बाद में अस्पताल पहुंचाया।
मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो रेबीज कितना खतरनाक हो सकता है।
आवारा कुत्ते ने काटा था, लेकिन नहीं कराया इलाज
मिली जानकारी के मुताबिक, हेमंत नाम के युवक को कुछ समय पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। बताया जा रहा है कि काटने के बाद उसने समय रहते एंटी-रेबीज उपचार नहीं कराया।
कुछ समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। युवक में रेबीज से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे और उसका व्यवहार असामान्य हो गया।
हालात इतने बिगड़ गए कि वह अपने शरीर को ही काटने लगा और आसपास के लोगों पर हमला करने की कोशिश करने लगा।
बेकाबू हुआ युवक तो लोगों ने बांध दिया
युवक के हिंसक और असामान्य व्यवहार को देखते हुए आसपास मौजूद लोगों ने उसे काबू में करने की कोशिश की। स्थिति बेकाबू होने पर उसे बांध दिया गया।
सूचना मिलने के बाद 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और युवक को गोटरी अस्पताल ले जाया गया। बाद में उसे उपचार के लिए संक्रामक रोग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा है।
डॉक्टर ने बताया- रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद खतरा बेहद ज्यादा
इन्फेक्शन स्पेशलिस्ट डॉ. हितेन करेलिया के मुताबिक, रेबीज एक बेहद गंभीर वायरल बीमारी है और लक्षण शुरू होने के बाद इसके खिलाफ प्रभावी उपचार बेहद सीमित हो जाता है।
उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि कुत्ते के काटने के बाद यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि घाव छोटा है या कुत्ता सामान्य दिखाई दे रहा था।
सबसे जरूरी कदम है—घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना और बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र जाकर रेबीज से बचाव का उपचार शुरू कराना।
सिर्फ पानी से डरना ही नहीं, ये लक्षण भी हो सकते हैं खतरनाक
रेबीज के लक्षणों में शुरुआत में बुखार, बेचैनी, दर्द या काटे गए स्थान पर असामान्य झनझनाहट/संवेदना हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर पानी निगलने में परेशानी, पानी से डर जैसा व्यवहार, अत्यधिक उत्तेजना, भ्रम, असामान्य आक्रामकता और तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
जिसे आम बोलचाल में ‘पानी से डरना’ कहा जाता है, वह दरअसल निगलने वाली मांसपेशियों में ऐंठन और निगलने में कठिनाई से जुड़ा लक्षण हो सकता है।
एक जरूरी सुधार: रेबीज वायरस 2-14 दिन में ही असर करता है, यह सही नहीं
डॉक्टर के बयान में 2 से 14 दिन में वायरस के असर की बात कही गई है, लेकिन रेबीज की incubation period इतनी निश्चित नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आमतौर पर यह 2-3 महीने होती है, हालांकि कुछ मामलों में यह एक सप्ताह से लेकर एक साल तक भी हो सकती है।
इसलिए कुत्ते के काटने के बाद कई दिन या हफ्ते तक कोई लक्षण न दिखने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति सुरक्षित है।
कुत्ते के काटने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य संभावित रेबीज संक्रमित जानवर ने काटा है तो:
1. घाव को तुरंत धोएं
साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक घाव को अच्छी तरह धोना चाहिए।
2. तुरंत अस्पताल जाएं
लक्षणों का इंतजार न करें। डॉक्टर तय करेंगे कि रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर Rabies Immunoglobulin (RIG) की आवश्यकता है या नहीं।
3. घाव को खुद से बंद न करें
घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी, जड़ी-बूटी या कोई अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
4. वैक्सीन का पूरा शेड्यूल पूरा करें
डॉक्टर द्वारा निर्धारित सभी वैक्सीन डोज समय पर लेना बेहद जरूरी है।
‘कुत्ता स्वस्थ दिख रहा था’ तो भी लापरवाही न करें
कई लोग कुत्ते के काटने के बाद यह सोचकर इलाज नहीं कराते कि जानवर देखने में स्वस्थ था। यह खतरनाक लापरवाही हो सकती है।
WHO के मुताबिक, कुत्ते के काटने या संभावित exposure के बाद रेबीज से बचाव का उपचार समय पर शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है। रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा होती है, जबकि exposure के तुरंत बाद उचित post-exposure prophylaxis (PEP) से बीमारी को रोका जा सकता है।
पालनपुर में भी सामने आया था ऐसा मामला
वडोदरा की घटना से पहले गुजरात के पालनपुर से भी इसी तरह का मामला सामने आया था। जनवरी 2026 में 27 वर्षीय देवाभाई के बारे में रिपोर्ट सामने आई थी कि कुत्ते के काटने के बाद उनमें गंभीर लक्षण विकसित हुए और वह लोगों को काटने की कोशिश करने लगे थे।
उनमें हाइड्रोफोबिया और आक्रामक व्यवहार जैसे लक्षण सामने आने की बात कही गई थी।
सबसे बड़ा सबक: कुत्ते के काटने को कभी हल्के में न लें
वडोदरा का यह मामला डराने वाला जरूर है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी इसका संदेश है—रेबीज के लक्षणों का इंतजार करना जानलेवा हो सकता है।
कुत्ते के काटने के बाद व्यक्ति सामान्य दिख रहा हो, घाव छोटा हो या कई दिन तक कोई परेशानी न हो, फिर भी तुरंत चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर शुरू किया गया PEP रेबीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

