पश्चिम बंगाल में कैसे एकजुट हुए हिंदू मतदाता? VHP के नेता हेमंत जांबेकर ने बताई एक-एक बात

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पश्चिम बंगाल में कैसे एकजुट हुए हिंदू मतदाता? VHP के नेता हेमंत जांबेकर ने बताई एक-एक बात

नागपुर: विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत के उपाध्यक्ष हेमंत जांबेकर ने कहा है कि पिछले तीन से चार वर्षों से विश्व हिंदू परिषद पश्चिम बंगाल में हिंदू समाज को संगठित करने और हिंदुत्व की भावना मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि इसी अभियान का असर पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में देखने को मिला। हेमंत जांबेकर ने बताया कि VHP ने सबसे पहले साधु-संतों, मठाधीशों, मंदिरों के पुजारियों और पंडितों को एक मंच पर लाने की रणनीति बनाई।

‘अलग-अलग क्षेत्रों में हुए 35 से 40 हजार कार्यक्रम’

जांबेकर ने कहा कि सबको एकजुट करने की रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों के संतों को एकत्र किया गया। इसमें पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, नागालैंड, सिक्किम और अन्य ‘सिस्टर स्टेट्स’ के साधु-संत शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा से लेकर हनुमान जयंती और राम जन्मोत्सव तक बड़े स्तर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। करीब 35 से 40 हजार कार्यक्रम अलग-अलग क्षेत्रों में हुए, जिनका उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना था।’

‘डेढ़ करोड़ लोगों ने हाथों में जल लेकर लिया था संकल्प’

जांबेकर के मुताबिक, विभिन्न राज्यों से आए साधु-संत गांवों और मोहल्लों में छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करते थे। उन्होंने कहा, ‘इन बैठकों में 50 से 100 लोग शामिल होते थे। पूजा-पाठ, भजन, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रमों के बाद लोगों को हाथ में जल देकर देवी दुर्गा का स्मरण कराया जाता था और उनसे संकल्प दिलाया जाता था कि वे हिंदू हित की बात करने वालों को सत्ता में लाएंगे। लगभग डेढ़ करोड़ लोगों ने हाथों में जल लेकर मां दुर्गा को साक्षी मानते हुए यह संकल्प लिया था कि पश्चिम बंगाल में हिंदू हित की बात करने वाली सरकार लानी है।’

‘राम उत्सव और धार्मिक सभाओं की शुरुआत की गई’

हेमंत जांबेकर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू विरोधी माहौल होने के कारण बड़े धार्मिक आयोजनों में कई तरह की परेशानियां आती थीं। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में VHP ने छोटे स्तर पर कार्यक्रम करने की योजना बनाई। प्रखंड और खंड स्तर पर राम उत्सव और धार्मिक सभाओं की शुरुआत की गई। जिन क्षेत्रों में 10 से 15 गांवों को मिलाकर लगभग 10 हजार की आबादी होती थी, वहां साधु-संत प्रवास करते थे और हिंदू हित से जुड़े मुद्दों पर लोगों से संवाद करते थे। इसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में हिंदू मतदाता मतदान के लिए बाहर निकले और लगभग 90 प्रतिशत तक मतदान दर्ज हुआ।’

‘बंगाल की संस्कृति को समझने वाले साधु आगे लाए गए’

जांबेकर ने कहा कि ऐसे साधु-संतों को आगे लाया गया जो बंगाल की भाषा और संस्कृति को समझते थे और स्थानीय लोगों पर प्रभाव डाल सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले तक भगवा वस्त्र पहनकर घूमने वाले साधु-संतों के साथ मारपीट की घटनाएं भी होती थीं, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में VHP के कार्यकर्ता और साधु-संत एक साथ आए, जिससे हिंदुत्व की लहर बनी। जांबेकर ने कहा कि साधु-संतों और VHP के कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू हित की बात करने वाली राजनीतिक ताकत को मजबूती मिली।

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