आम लोगों की खास ट्रेन कैसे बनी वंदे भारत? दुनिया की हाई-स्पीड ट्रेनों से अलग क्यों है ये ट्रेन, जानिए पूरी कहानी

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आम लोगों की खास ट्रेन कैसे बनी वंदे भारत? दुनिया की हाई स्पीड ट्रेनों से भी है स्पेशल

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की वंदे भारत एक्सप्रेस आज देश की सबसे चर्चित प्रीमियम ट्रेनों में शामिल है। तेज सफर, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर यात्री अनुभव इसकी पहचान बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ट्रेन को आज देशभर में वंदे भारत के नाम से जाना जाता है, उसे शुरुआत में Train 18 नाम दिया गया था?

भारतीय रेलवे के इंजीनियरों ने इसे देश में ही विकसित किया था। बाद में इसका नाम बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस कर दिया गया। अब भारतीय रेलवे इस ट्रेन को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे का सार्वजनिक उपक्रम RITES Ltd. यूरोपीय देशों समेत विदेशी बाजारों में स्टैंडर्ड-गेज ट्रैक के लिए वंदे भारत के निर्यात की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

दुनिया की तेज ट्रेनों के बीच कहां खड़ी है वंदे भारत?

दुनिया में हाई-स्पीड रेल की कई बेहतरीन मिसालें हैं। चीन की Shanghai Maglev और Fuxing, जापान की Shinkansen, फ्रांस की TGV, जर्मनी की ICE, दक्षिण कोरिया की KTX और इटली की Frecciarossa अपनी रफ्तार के लिए जानी जाती हैं।

वंदे भारत इन ट्रेनों से अधिकतम गति के मामले में आगे नहीं है, लेकिन इसकी खासियत इसका भारतीय रेलवे के हिसाब से डिजाइन, अपेक्षाकृत कम निर्माण लागत और आधुनिक यात्री सुविधाओं का संयोजन है।

चीन की Shanghai Maglev

Shanghai Maglev दुनिया की सबसे तेज रेल सेवाओं में गिनी जाती है। मैग्नेटिक लेविटेशन तकनीक से चलने वाली यह ट्रेन करीब 430 किमी/घंटा तक की गति हासिल कर सकती है। हालांकि इसके लिए विशेष बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ती है और निर्माण व संचालन की लागत भी काफी अधिक होती है।

जापान की Shinkansen

जापान की Shinkansen करीब 300-320 किमी/घंटा की गति से चल सकती है। तेज रफ्तार के साथ सुरक्षा और समय की पाबंदी इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। भूकंप जैसे प्राकृतिक खतरों वाले जापान में इसके लिए विशेष सुरक्षा तकनीक विकसित की गई है।

फ्रांस की TGV

फ्रांस की TGV करीब 320 किमी/घंटा तक की गति हासिल कर सकती है और यूरोप की प्रमुख हाई-स्पीड रेल सेवाओं में शामिल है।

जर्मनी की ICE

जर्मनी की ICE ट्रेन करीब 300 किमी/घंटा तक की रफ्तार पकड़ सकती है। इसमें यात्रियों के आराम और आधुनिक सुविधाओं पर खास जोर दिया गया है।

दक्षिण कोरिया की KTX

दक्षिण कोरिया की KTX करीब 305 किमी/घंटा की गति से चलती है। यह देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की प्रमुख ट्रेन है।

इटली की Frecciarossa

इटली की Frecciarossa ट्रेन करीब 300 किमी/घंटा की गति से चलती है और यूरोप की प्रमुख हाई-स्पीड रेल सेवाओं में गिनी जाती है।

फिर वंदे भारत को क्यों माना जाता है खास?

वंदे भारत की अधिकतम परिचालन गति 160 किमी/घंटा है, यानी यह दुनिया की सबसे तेज हाई-स्पीड ट्रेनों की श्रेणी में नहीं आती। इसे तकनीकी रूप से सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन कहा जाता है।

लेकिन इसकी असली खासियत इसकी लागत और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन है। एक 16-कोच वंदे भारत ट्रेनसेट की निर्माण लागत करीब 110-130 करोड़ रुपये बताई जाती है, जो कई विदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेटों की तुलना में काफी कम है।

यही वजह है कि भारत में मौजूदा रेल नेटवर्क के भीतर आधुनिक ट्रेन सेवा का विस्तार करने के लिहाज से वंदे भारत को महत्वपूर्ण माना जाता है।

52 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार

वंदे भारत की सबसे खास तकनीकी खूबियों में इसकी तेज एक्सीलरेशन शामिल है। यह 0 से 100 किमी/घंटा की गति करीब 52 सेकंड में हासिल कर सकती है।

इसके अलावा ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कवच (KAVACH) जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है।

घूमने वाली सीट से लेकर टच-फ्री टॉयलेट तक

वंदे भारत में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।

  • एग्जीक्यूटिव क्लास में 180 डिग्री तक घूमने वाली सीटें
  • ऑटोमैटिक प्लग डोर
  • GPS आधारित यात्री सूचना प्रणाली
  • सेंसर और टच-फ्री सुविधाओं वाले बायो-वैक्यूम टॉयलेट
  • CCTV कैमरे
  • आपातकालीन खिड़कियां
  • टॉक-बैक यूनिट
  • मिनी पेंट्री
  • गर्म भोजन और ठंडे पेय की सुविधा

इन सुविधाओं ने वंदे भारत को भारतीय रेलवे की पारंपरिक ट्रेनों से काफी अलग यात्री अनुभव दिया है।

रेलवे के लिए कमाई का भी बड़ा जरिया बनी वंदे भारत

वंदे भारत की लोकप्रियता सिर्फ इसकी तकनीक और डिजाइन तक सीमित नहीं है। इसकी बढ़ती यात्री संख्या ने इसे रेलवे के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वंदे भारत से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या करीब 3.97 करोड़ रही, जो FY25 के लगभग 2.97 करोड़ से करीब 34 फीसदी अधिक है।

2019 में नई दिल्ली-वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत सेवा शुरू होने के बाद से ट्रेन ने करीब एक लाख ट्रिप पूरे किए हैं। इसका नेटवर्क देश के करीब 270 जिलों को जोड़ता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि यात्री समय बचाने और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रीमियम किराया देने को तैयार हैं।

अब रात के सफर में भी बढ़ेगी पहुंच

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत के साथ इस मॉडल को लंबी दूरी और रात के सफर तक ले जाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। इसका मतलब है कि वंदे भारत का मॉडल सिर्फ दिन के तेज सफर तक सीमित नहीं रहेगा।

रेलवे की दीर्घकालिक योजनाओं में 2030 तक 800 से अधिक वंदे भारत ट्रेनसेट शामिल किए जाने की बात कही गई है।

क्या वंदे भारत दुनिया की हाई-स्पीड ट्रेन से बेहतर है?

सीधे तौर पर ऐसा कहना सही नहीं होगा। रफ्तार के मामले में Shanghai Maglev, Shinkansen, TGV या Frecciarossa जैसी ट्रेनें वंदे भारत से काफी आगे हैं।

लेकिन वंदे भारत की सफलता का पैमाना अलग है। इसे भारत के मौजूदा रेल ढांचे, यात्रियों की जरूरतों और लागत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। कम लागत में आधुनिक सुविधाओं वाली तेज ट्रेन उपलब्ध कराना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

यही कारण है कि Train 18 से शुरू हुआ सफर आज वंदे भारत के रूप में भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की पहचान बन चुका है। अब अगर इसका निर्यात भी शुरू होता है, तो यह भारत के स्वदेशी रेल इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक और बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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