महाराजपुर थाना क्षेत्र के फुफवार राजथोक गांव निवासी 38 वर्षीय महेश ने बीती 14 जुलाई को महाराजपुर थाना परिसर के अंदर ज्वलनशील पदार्थ खुद पर डालकर आग लगा ली थी। इस दौरान उसे बचाने में प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी भी झुलस गए थे। गंभीर रूप से झुलसे महेश का पहले उर्सला अस्पताल में उपचार चला, फिर हालत नाजुक होने पर उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। जहां रविवार मध्यरात्रि सात दिन तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद महेश ने दम तोड़ दिया।
मृतक की बहन दाया ने बताया कि उर्सला में उपचार के दौरान महेश ने पूरी घटना बताई थी। उसके अनुसार सबसे पहले घर में पत्नी के साथ एक अनजान युवक के रुकने को लेकर विवाद हुआ था। इसी बात पर नाराज होकर पत्नी पूनम ने अपने पिता और बहनोई को बुलाकर मायके चली गई थी। जब महेश पत्नी को मनाने ससुराल पहुंचा तो आरोप है कि ससुर, सास और साढ़ू एवं साली ने मिलकर उसकी पिटाई की और रास्ते भर मारते हुए थाने तक ले गए। बहन का आरोप है कि थाने पर भी महेश के साथ मारपीट हुई। इससे आहत महेश किसी तरह थाने से छूटकर वापस महाराजपुर आया और पत्नी के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। भाई रोहित के मुताबिक महेश को जेल जाने का डर और पिटाई से आहत होने के कारण मानसिक रूप से टूट गया था। इसी परेशानी में आकर उसने थाने के अंदर खुद को आग के हवाले कर लिया।
महेश की पत्नी पूनम 13 वर्षीय बेटी पायल और 8 वर्षीय बेटा आयुष को लेकर मायके चली गई थी। रोहित ने यह भी आरोप लगाया कि महेश की गैर मौजूदगी में दूर का एक रिश्तेदार अक्सर घर आकर रात में रुकता था। इसी बात को लेकर आए दिन विवाद होता था, जो महेश की मौत का कारण बना। घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। महाराजपुर थाना प्रभारी जनार्दन सिंह ने बताया कि बहन और भाई के बयान एवं तहरीर तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

