रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में साफ-सफाई, चादर-कंबल और यात्री सुविधाओं की मॉनिटरिंग के लिए ऑन-बोर्ड सेवा (ओबीएचएस) नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति से ट्रेनों में विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और संबंधित कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी। यह व्यवस्था कानपुर सेंट्रल, गोविंदपुरी, पनकी धाम व अनवरगंज स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों में लागू होगी।
अभी तक ट्रेनों में सफाई और लिनेन के लिए अलग-अलग एजेंसियां काम करती थीं, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल होता था। नई नीति के तहत, अब शुरुआत से अंत तक की पूरी जिम्मेदारी एक ही प्रतिष्ठित एजेंसी को दी जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस एजेंसी के चयन के लिए अनुभव और प्रतिष्ठा के कड़े मानक तय किए हैं। इस सेवा की मॉनिटरिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स से की जाएगी। सफाई कर्मियों को अपने काम की जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो एप पर अपलोड करनी होगी।
सफाई का नया शेड्यूल और जवाबदेही नई नीति में सफाई का एक विस्तृत शेड्यूल भी जारी किया गया है। शौचालयों की सफाई सुबह छह से नौ बजे और रात आठ से दस बजे के बीच हर घंटे होगी। अन्य समय पर प्रत्येक दो घंटे पर सफाई की जाएगी। रेलवे बोर्ड के निदेशक (पर्यावरण व गृह व्यवस्था प्रबंधन) लव शुक्ला ने उत्तर-मध्य रेलवे सहित सभी जोन को इस संबंध में पत्र जारी किया है। पहले चरण में हर जोन की पांच चुनिंदा ट्रेनों में यह व्यवस्था शुरू की जाएगी, जिसमें कानपुर से होकर गुजरने वाली वंदे भारत और शताब्दी जैसी ट्रेनें भी शामिल होंगी।
कर्मचारियों की योग्यता और दंड का प्रावधान नई नीति के तहत, कोच अटेंडेंट या सुपरवाइजर के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास और आईटीआई अनिवार्य कर दी गई है। उन्हें सफाई के साथ-साथ प्राथमिक चिकित्सा और छोटे-मोटे रिपेयरिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यदि कोई स्टाफ यात्री से दुर्व्यवहार करता है या सफाई में लापरवाही बरतता है, तो संबंधित एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उसे ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है।
नई नीति को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यात्रियों से स्टार-रेटिंग भी ली जाएगी, जिससे सर्विस देने वाली कंपनी का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होगा। – शशिकांत त्रिपाठी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-मध्य रेलवे

