महिला को मोहरा बनाकर नवाबगंज निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 2.5 करोड़ की साइबर ठगी करने के आरोपी को क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पकड़ा गया आरोपी बिजनौर के थाना चांदपुर स्थित खानपुर गांव निवासी विपिन कुमार है। आरोप है कि महिला के माध्यम से क्रिप्टो में निवेश का झांसा देकर रकम ठगी थी। आरोपी के बैंक खाते में ठगी के 45 लाख रुपये मिले हैं।
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार ने बताया कि नवाबगंज निवासी और 2022 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुंबई की एक शाखा से रिटायर्ड अनिल कुमार ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि 15 जुलाई 2025 में उनके मोबाइल पर इरा रेड्डी नाम की महिला ने आर यू रीचड् एयरपोर्ट का मैसेज भेजा। टोकने पर महिला ने कहा कि मैसेज गलती से चला गया। इसके बाद अनिल की महिला से व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत होने लगी। अनिल के मुताबिक महिला ने सात-आठ दिनों तक लगातार टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से उनसे बातचीत शुरू की।
10 दिन में भरोसा जीतकर लौटाए 10 हजार
जब महिला ने उन्हें पूरी तरह भरोसे में ले लिया तब 25 जुलाई को वीडियो कॉल पर अनिल से एक व्यक्ति का परिचय अपना भाई बताकर कराया। इसके अलावा कहा कि वह क्रिप्टो में निवेश का फायदा उठा रही है इसलिए अनिल को भी निवेश करना चाहिए। अनिल उनकी बातों में आ गए और अगले ही दिन महिला के कहने पर क्वाइनेक्स एप्लीकेशन डाउनलोड कर पांच लाख रुपये क्रिप्टो में निवेश कर दिए। भरोसा जीतने के लिए महिला ने अनिल के खाते में 10 हजार रुपये वापस भेज दिए।
रिश्तेदारों से उधार और फ्लैट पर लिया ऋण
कुछ समय बाद महिला ने एक कथित बोनस स्कीम का हवाला देते हुए दो करोड़ रुपये निवेश करने को कहा। शुरुआत में तो अनिल ने हिम्मत नहीं की लेकिन वह महिला की बातों में इस कदर उलझे कि नाते रिश्तेदारों से उधार और फ्लैट के नाम पर ऋण लेकर किसी तरह दो करोड़ रुपये का निवेश और कर दिया। इतना ही नहीं टैक्स, बोनस, जोखिम नियंत्रण एवं अन्य वित्तीय कारणों का हवाला देकर और 36 लाख रुपये और जमा कराए गए। इरा रेड्डी की बातों में आकर कुल 2.52 करोड़ गंवाने वाले अनिल से जब निवेश के नाम पर और रकम की मांग की गई। तब जाकर रिटायर्ड मैनेजर को संदेह हुआ। जानकारी करने पर पता चला कि उनकी ई-मेल आईडी एवं मोबाइल नंबर का कोई वैध पंजीकरण ही नहीं था। पुलिस से शिकायत करने पर मामला साइबर थाने में दर्ज कराया गया।
इस तरह पकड़ में आया शातिर
डीसीपी क्राइम ने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद जब टीम ने जांच शुरू की तो लेनदेन वाले बैंक खातों, डिवाइस लॉग्स, व्हाट्सएप, टेलीग्राम चैट, वित्तीय ट्रांजेक्शन, आईपी लॉग्स व क्रिप्टो ट्रेल आदि की जांच की गई। इसमें पता चला कि रिटायर्ड बैंक कर्मी के खाते से निकली रकम कई बैंक खातों में भेजी गई। इन्हीं में से एक बैंक खाता आरोपी विपिन का भी निकला जिसमें 45 लाख रुपये भेजे गए थे। इस पर तत्काल ही टीम को बिजनौर भेजकर आरोपी की गिरफ्तारी कराई। डीसीपी के मुताबिक मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।

