केजीएमयू लखनऊ के रेजीडेंट डॉक्टर रमीज मलिक से जुड़े शादी का झांसा, यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के मामले में अब कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है। एक युवती से डॉक्टर का फर्जी निकाह कराने वाले पीलीभीत के काजी के खिलाफ भी लखनऊ कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। काजी की गिरफ्तारी के लिए लखनऊ की चौक कोतवाली पुलिस ने पीलीभीत पुलिस से सहयोग मांगा है। जल्द ही लखनऊ पुलिस की टीम पीलीभीत पहुंचकर गिरफ्तारी कर सकती है।
लखनऊ केजीएमयू में अध्ययनरत एक छात्रा की तहरीर पर रेजीडेंट डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ शादी का झांसा देकर यौन शोषण और धर्म परिवर्तन कराने की रिपोर्ट चौक कोतवाली में दर्ज की गई थी। मामले में आरोपी डॉक्टर के जेल जाने के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी तो कथित निकाह की परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि रमीज मलिक मूल रूप से पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र का रहने वाला है। उसका निकाह पीलीभीत में दर्शाया गया था। लखनऊ पुलिस को इनपुट मिला कि यह निकाह शहर कोतवाली क्षेत्र के फीलखाना मोहल्ले के काजी जाहिद हसन राना ने कराया था।
गवाह सारिक को किया गिरफ्तार
मोहल्ले का ही सारिक नामक युवक गवाह बना था। इस जानकारी पर सात जनवरी को चौक कोतवाली पुलिस ने पीलीभीत पुलिस के सहयोग से काजी और गवाह के घर पर छानबीन की थी। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि डॉ. रमीज मलिक और युवती निकाह के लिए पीलीभीत आए ही नहीं थे, बल्कि काजी और गवाह की भूमिका दिखाते हुए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए थे। आरोपी डॉक्टर से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया। इसी क्रम में बृहस्पतिवार शाम लखनऊ पुलिस ने गवाह सारिक को पीलीभीत से गिरफ्तार कर लिया।
जल्द हो सकती है काजी की गिरफ्तारी
इसके बाद शुक्रवार को काजी जाहिद हसन राना का नाम भी दर्ज रिपोर्ट में बढ़ाते हुए कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। लखनऊ पुलिस ने काजी की गिरफ्तारी के लिए पीलीभीत कोतवाली पुलिस से औपचारिक रूप से सहयोग मांगा है। बताया जा रहा है कि लखनऊ पुलिस की एक टीम जल्द पीलीभीत आकर काजी की तलाश में दबिश दे सकती है। कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि काजी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो चुका है। लखनऊ पुलिस के पीलीभीत आने पर नियमानुसार पूरा सहयोग किया जाएगा।

