Lucknow: नए रूट का सर्वे कराया, फिर 15 साल पुराने रास्ते पर दौड़ा दी बस, नैमिषारण्य सेवा का ट्रायल फेल!

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Lucknow: नए रूट का सर्वे कराया, फिर 15 साल पुराने रास्ते पर दौड़ा दी बस, नैमिषारण्य सेवा का ट्रायल फेल!

लखनऊ: नैमिषारण्य जाने वाले यात्रियों के लिए बस सेवा शुरू करने की तैयारी में रोडवेज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कैसरबाग से नैमिषारण्य वाया चंद्रिका देवी के लिए जिस नए रूट का सर्वे कराया गया था, ट्रायल के दौरान बस उसी रास्ते के बजाय करीब 15 साल पुराने रूट पर दौड़ा दी गई। नतीजा यह रहा कि दूरी में कोई खास कमी नहीं आई और अधिकारियों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। अब रोडवेज दोबारा सर्वे कराने की तैयारी में है।

नए रूट का सर्वे, लेकिन ट्रायल पुराने रास्ते पर

रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र की ओर से कैसरबाग से नैमिषारण्य के लिए नई बस सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य यात्रियों को चंद्रिका देवी के रास्ते कम दूरी में नैमिषारण्य पहुंचाना था।

इसके लिए नए रूट का सर्वे भी कराया गया। लेकिन बुधवार को जब बस का ट्रायल किया गया तो उसे पुराने रूट पर ही चला दिया गया। करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय होने के कारण अधिकारियों को सफर छोटा होने का अपेक्षित लाभ नहीं मिला।

अब दोनों मार्गों की फिजिबिलिटी की दोबारा जांच की जाएगी।

15 साल पहले भी चलती थीं मिनी बसें

करीब 15 साल पहले कैसरबाग से चंद्रिका देवी होते हुए नैमिषारण्य के लिए मिनी बसों का संचालन किया जाता था। उस समय सड़कें पर्याप्त चौड़ी नहीं होने के कारण सीमित संख्या में बसें चलती थीं। बाद में यह सेवा बंद हो गई।

अब क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने इस धार्मिक और पर्यटन स्थल के लिए दोबारा बस सेवा शुरू करने की पहल की है। इसके लिए नए रूट का सर्वे कराया गया था।

पुराने रूट पर ये थे 18 पड़ाव

करीब 15 साल पहले चलने वाले रूट पर बसों के लिए लगभग 18 पड़ाव निर्धारित थे। यह मार्ग मड़ियांव, बीकेटी, चंद्रिका देवी और सैदापुर से होते हुए आगे बढ़ता था।

इसके बाद बसें शंकरपुर, बरगदिया, नेवादा, भरावन, अतरौली, गोंडवा, कोथावां, बेनीगंज, प्रतापनगर होते हुए नैमिषारण्य पहुंचती थीं।

नए रूट में क्या है बदलाव?

सर्वे किए गए नए मार्ग में भी शुरुआत मड़ियांव, बीकेटी, चंद्रिका देवी और सैदापुर से होती है। इसके बाद बस माल, नेवादा, गोंडवा, हत्याहरण और भैनगांव होते हुए नैमिषारण्य पहुंचाने की योजना है।

अधिकारियों के अनुसार दोनों रूटों की दूरी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। हालांकि नए मार्ग का सर्वे मुख्य रूप से नए विकसित क्षेत्रों और वहां रहने वाले यात्रियों को बस सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया था।

यात्रियों ने की दो जोड़ी बसों की मांग

नए रूट के आसपास रहने वाले लोगों ने रोडवेज से सुबह के समय दो जोड़ी बसें चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि नियमित बस सेवा शुरू होने से स्थानीय यात्रियों के साथ नैमिषारण्य जाने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी सुविधा मिलेगी।

करीब 100 किलोमीटर की दूरी को देखते हुए इस मार्ग पर बस का किराया लगभग 142 रुपये तक होने का अनुमान है।

दोबारा सर्वे के बाद होगा फैसला

क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन के मुताबिक, कैसरबाग से चंद्रिका देवी होते हुए नैमिषारण्य के लिए बस सेवा शुरू करने की तैयारी है। बुधवार को इसका ट्रायल किया गया। अब पुराने और प्रस्तावित नए रूट की दूरी, यातायात और फिजिबिलिटी की जांच की जाएगी। इसके बाद जल्द ही नियमित बस सेवा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा।

यानी नैमिषारण्य के लिए बस सेवा का रास्ता खुल गया है, लेकिन सही रूट तय करने के लिए रोडवेज को एक बार फिर सर्वे की जरूरत पड़ रही है।

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