SC का बड़ा फैसला: सिर्फ क्रिमिनल केस पेंडिंग होने पर सरकारी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते

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सिर्फ क्रिमिनल केस पेंडिंग होने के चलते नौकरी से नहीं हटा सकते सरकारी कर्मचारी: SC

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की सेवा से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर उसे नौकरी से हटाया नहीं जा सकता, खासकर तब, जब उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी न दिया गया हो।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने एक सिपाही को नौकरी से हटाने के फैसले को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि संबंधित कर्मचारी को हटाए जाने के समय किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया गया था और कार्रवाई केवल उसके खिलाफ मामला लंबित होने के आधार पर की गई थी।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि कर्मचारी को इसलिए नौकरी से नहीं हटाया गया था कि किसी आपराधिक आरोप में उसकी दोषसिद्धि हो चुकी थी, बल्कि केवल इसलिए कार्रवाई की गई क्योंकि उसके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित था।

पीठ ने यह भी कहा कि उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। कोर्ट को ऐसा कोई कानून नहीं मिला, जो किसी सरकारी नियोक्ता को लंबे समय से पुलिस विभाग में काम कर रहे कर्मचारी को महज लंबित आपराधिक मामले के आधार पर सेवा से हटाने का अधिकार देता हो।

नौकरी बहाल करने के बजाय मिलेगा 5 लाख रुपये मुआवजा

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक से ज्यादा समय बीत जाने के कारण कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर बहाल करने का आदेश नहीं दिया।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पंजाब सरकार को अपीलकर्ता को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

2002 में ड्यूटी जॉइन करने से रोक दिया गया था

मामले के अनुसार, अपीलकर्ता की वर्ष 1991 में पंजाब पुलिस में स्पेशल पुलिस ऑफिसर के तौर पर नियुक्ति हुई थी। बाद में उसे पटियाला स्थित फर्स्ट इंडियन रिजर्व बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्ति के लिए चुना गया।

हालांकि, अगस्त 2002 में उसे ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके पीछे उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को आधार बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है कि आपराधिक मामला लंबित होना और किसी अपराध में दोषी साबित होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। केवल केस पेंडिंग होने को आधार बनाकर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई करने से पहले कानूनी प्रक्रिया और कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।

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