MJPRU Bareilly: रुहेलखंड विश्वविद्यालय को मिला नया कुलपति, प्रो. अनिल कुमार राय संभालेंगे कमान; सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

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MJPRU Bareilly: रुहेलखंड विश्वविद्यालय के नए कुलपति होंगे प्रो. अनिल कुमार राय, सामने होंगी ये चुनौतियां

बरेली: महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) को नया कुलपति मिल गया है। प्रो. अनिल कुमार राय को विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। वह फिलहाल राजस्थान की पंडित दीन दयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के कुलपति के पद पर कार्यरत हैं। माना जा रहा है कि वह 31 अगस्त के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कार्यभार संभाल सकते हैं।

प्रो. अनिल कुमार राय के सामने विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने के साथ-साथ घटते संबद्ध महाविद्यालयों और सीमित आर्थिक संसाधनों जैसी चुनौतियां भी होंगी।

कौन हैं प्रो. अनिल कुमार राय?

प्रो. अनिल कुमार राय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। शेखावाटी विश्वविद्यालय से पहले वह महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

उन्होंने मानविकी, शिक्षा, प्रबंधन और छात्र अधिष्ठाता जैसे पदों पर काम किया है। इसके अलावा सेंटर ऑफ कम्युनिकेशन एंड मीडिया स्टडीज तथा IQAC के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली है।

वह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में मास कम्युनिकेशन, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास और एंथ्रोपोलॉजी समेत विभिन्न विभागों के प्रमुख भी रह चुके हैं।

सबसे बड़ी चुनौती होगी आर्थिक संसाधन बढ़ाना

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सामने नए कुलपति के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आर्थिक संसाधनों को मजबूत करना होगी।

एक समय विश्वविद्यालय से 500 से अधिक महाविद्यालय संबद्ध हुआ करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर करीब 150 रह गई है। संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या कम होने के साथ विश्वविद्यालय की आय के स्रोतों पर भी असर पड़ा है।

इसके अलावा विद्यार्थियों की घटती संख्या और सीमित आय के संसाधनों के बीच विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना प्रो. अनिल कुमार राय के लिए अहम चुनौती होगी।

प्रो. केपी सिंह का छह साल का कार्यकाल समाप्त

नए कुलपति की नियुक्ति के साथ वर्तमान कुलपति प्रो. केपी सिंह का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है। वर्ष 2020 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए प्रो. केपी सिंह छह साल से अधिक समय तक इस पद पर रहे।

वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय में दूसरा कार्यकाल पाने वाले केवल दूसरे कुलपति रहे। उनसे पहले जाहिद हुसैन जैदी ने दो कार्यकाल पूरे किए थे।

फिलहाल प्रो. केपी सिंह ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।

प्रो. केपी सिंह के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने हासिल कीं ये उपलब्धियां

प्रो. केपी सिंह के कार्यकाल में रुहेलखंड विश्वविद्यालय को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिलीं।

  • वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय को NAAC A++ ग्रेड मिला।
  • NIRF में विश्वविद्यालय ने 101-150 बैंड में स्थान हासिल किया।
  • QS Asia Ranking में भी विश्वविद्यालय को 901-950 बैंड में स्थान मिला।
  • नाइजीरिया, नेपाल और भूटान समेत अन्य देशों से विद्यार्थियों का आगमन हुआ।
  • डिजिटल लर्निंग हब और डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए।
  • विश्वविद्यालय परिसर में बॉटनिकल गार्डन का निर्माण हुआ।

कार्यकाल में विवाद भी रहे

उपलब्धियों के साथ प्रो. केपी सिंह का कार्यकाल विवादों से भी अछूता नहीं रहा। पूर्व वित्त अधिकारी केके शंखधार की ओर से की गई शिकायतें लंबे समय तक चर्चा में रहीं। ये शिकायतें शासन स्तर तक भी पहुंचीं, हालांकि इनकी जांच पूरी होने को लेकर सवाल बने रहे।

इसके अलावा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के EPF में कथित 50 लाख रुपये के गबन, परीक्षा के दौरान वाहनों पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च, कोरोना किट की खरीद से जुड़े करीब चार करोड़ रुपये के कथित दबाव और संघटक महाविद्यालयों में बिना पद सृजित किए नियुक्तियों जैसे आरोप भी सामने आए।

अस्तित्वहीन विभागों में नियुक्तियों को लेकर भी शिकायतें की गई थीं। इन मामलों में आरोपों की अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।

अब नए कुलपति से क्या उम्मीदें?

प्रो. अनिल कुमार राय के सामने अब विश्वविद्यालय की पिछली उपलब्धियों को बरकरार रखते हुए आर्थिक स्थिति मजबूत करने, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने, नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने और विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के नेटवर्क को मजबूत करने की चुनौती होगी।

उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू होने जा रहा है जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा, रोजगारपरक पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नए कुलपति की प्राथमिकताएं रुहेलखंड विश्वविद्यालय की आने वाली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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