पानीपत की लड़ाई के बाद 10 मई 1526 को आगरा आए मुगल बादशाह बाबर द्वारा बनवाए रामबाग के 500 साल पूरे होने के मौके पर 9 मई को स्मारक में इंटरप्रिटेशन सेंटर शुरू किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के क्षेत्रीय निदेशक रामबाग स्मारक के गेट पर बनाए गए इंटरप्रिटेशन सेंटर का उद्घाटन करने के लिए आगरा आ रहे हैं। इस सेंटर में समरकंद की चारबाग शैली में बनाए गए रामबाग का पूरा इतिहास बयां किया गया है।
यमुना नदी के किनारे मुगल बादशाह बाबर ने गर्मी से परेशान होकर बाग ए हिश्त-बहिश्त बनवाया था, जो जहांगीर काल में बाग-ए-नूर अफशां के नाम से जाना गया। इसी चारबाग के 500 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 9 मई को क्षेत्रीय निदेशक रामबाग में इंटरप्रिटेशन सेंटर की शुरुआत करने आ रहे हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार ने बताया कि इस सेंटर में वर्ष 1526 से लेकर अब तक रामबाग स्मारक में हुए बदलाव की कहानी को चित्रों के जरिए प्रदर्शित किया गया है। रामबाग के प्रवेश द्वार पर टिकट खिड़की के पास ही यह सेंटर बनाया गया है, जिससे पर्यटक रामबाग में प्रवेश से पहले ही स्मारक के बारे में सब कुछ जान सकें।

