अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के पांच दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम एज’ की समाप्ति के महज एक दिन बाद ही उत्तर कोरिया ने शनिवार को समुद्र की दिशा में कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। दक्षिण कोरिया और उसके पड़ोसी देशों ने इसकी पुष्टि की है।
वॉनसान से दागी गईं मिसाइलें
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) के अनुसार, शनिवार सुबह करीब सवा पांच बजे उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय इलाके वॉनसान से कई मिसाइलें दागे जाने का पता चला। ये मिसाइलें करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए उत्तर कोरिया के पूर्वी समुद्री क्षेत्र की ओर गईं। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इन मिसाइलों की सटीक विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, दागी गई मिसाइलें ह्वासोंग-11 सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइलें और 600 मिलीमीटर की मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर राउंड हो सकती हैं, जिन्हें एक के बाद एक क्रम में दागकर उनके प्रदर्शन का परीक्षण किया गया प्रतीत होता है।
दक्षिण कोरियाई सेना ने अपनी निगरानी व्यवस्था बढ़ा दी है और मिसाइल लॉन्च को लेकर अमेरिका व जापान के साथ लगातार जानकारी साझा की जा रही है। यह उत्तर कोरिया का करीब तीन हफ्ते में पहला बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है।
सैन्य अभ्यास को उकसावा मानता है उत्तर कोरिया
अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने शुक्रवार को अपना पांच दिवसीय ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा किया। यह अभ्यास जून 2024 में शुरू हुई श्रृंखला का चौथा संस्करण है, जिसमें तीनों देशों की सेनाओं ने हवा, समुद्र और साइबर क्षेत्र में संयुक्त रूप से अभ्यास किया। इसका मकसद तीनों देशों के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना बताया गया। उत्तर कोरिया इस अभ्यास को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा और संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखता है, जबकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इसे रक्षात्मक अभ्यास बताते रहे हैं।
अमेरिका बोला- तत्काल कोई खतरा नहीं
अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने कहा कि उत्तर कोरिया की मिसाइल लॉन्चिंग से अमेरिकी क्षेत्र या उसके सहयोगियों के लिए फिलहाल कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन अमेरिका अपने देश और सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध बना हुआ है।
उत्तर कोरिया ने पहले ही दी थी चेतावनी
सोमवार को सैन्य अभ्यास शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्री किम सोंग ग्यू ने इसकी आलोचना करते हुए चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया ‘मजबूत और निर्णायक जवाबी कदम’ उठाएगा। शनिवार के मिसाइल परीक्षण को उसी चेतावनी के अनुरूप उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
परमाणु ताकत बढ़ाने पर किम जोंग उन का जोर
इससे पहले रविवार को उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने देश के दूसरे नौसैनिक विध्वंसक जहाज को सेवा में शामिल करने के कार्यक्रम में अधिक भरोसेमंद परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की जरूरत बताई थी। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसके दोनों विध्वंसक जहाज परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें ले जाने में सक्षम हैं।
ट्रंप के फैसले के बावजूद नहीं माने किम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास को सीमित करने का आदेश दिया था, जिसके पीछे उन्होंने किम जोंग उन के साथ अपने बेहतर संबंधों का हवाला दिया था। हालांकि किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने इस फैसले को भी नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया था, यह कहते हुए कि सिर्फ अभ्यास की अवधि घटाने से उसका “उकसाने वाला और आक्रामक स्वरूप” नहीं बदलेगा।
विशेषज्ञों की राय: रूस-चीन से नजदीकी बढ़ा रही आत्मविश्वास
विश्लेषकों का मानना है कि अपने बढ़ते परमाणु कार्यक्रम और रूस-चीन के साथ मजबूत होते संबंधों के चलते उत्तर कोरिया पहले से अधिक आत्मविश्वास में नजर आ रहा है। जानकारों के अनुसार, किम जोंग उन किसी भी संभावित अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता में पहले से बेहतर शर्तें हासिल करना चाहते हैं। इस वर्ष की शुरुआत में किम ने कहा था कि यदि अमेरिका अपनी “शत्रुतापूर्ण नीति” छोड़ता है और उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता देता है, तो वे बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं।

