शिमला। हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल भरवाने वालों को अब अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ लागू कर दिया है। यह बढ़ोतरी 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गई है।
सरकार का कहना है कि इस उपकर से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण एवं सहायता से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
शिमला में अब पेट्रोल ₹103.05 प्रति लीटर
सेस लागू होने के बाद राजधानी शिमला में पेट्रोल की कीमत ₹102.45 से बढ़कर ₹103.05 प्रति लीटर हो गई है।
इसी तरह हाई-स्पीड डीजल पर भी 60 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त उपकर लगाया गया है। यानी फिलहाल वाहन चालकों पर इसका असर सीधे ईंधन की कीमत में दिखाई देगा।
हालांकि, 60 पैसे की बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन रोजाना पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए महीने के हिसाब से इसका अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
अनाथ और विधवाओं के नाम पर क्यों लगाया गया सेस?
हिमाचल सरकार ने इस उपकर को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने के उद्देश्य से लागू किया है।
सरकार के मुताबिक, इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल प्रदेश में अनाथ बच्चों और विधवाओं की सहायता तथा उनके कल्याण से संबंधित योजनाओं में किया जाएगा।
यानी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए इस अतिरिक्त शुल्क को सीधे सामाजिक सुरक्षा से जोड़ दिया है।
किस कानून के तहत वसूला जाएगा पैसा?
राज्य के कर एवं आबकारी विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यह सेस हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) अधिनियम, 2005 की धारा 6-A के तहत लगाया गया है।
इसकी वसूली पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री (Point of First Sale) पर की जाएगी।
सरकार को मिली थी ₹5 तक सेस लगाने की ताकत
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने अभी सिर्फ 60 पैसे प्रति लीटर का सेस लगाया है, जबकि विधानसभा से पारित संशोधन के तहत उसे इससे कहीं अधिक सेस लगाने की शक्ति मिली है।
बजट सत्र के दौरान पारित हिमाचल प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक, 2026 ने सरकार को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक ‘विधवा एवं अनाथ उपकर’ लगाने का अधिकार दिया था।
उस समय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि ₹5 अधिकतम सीमा है और सरकार अपने विवेक के अनुसार इससे कम राशि भी लगा सकती है।
यानी फिलहाल सरकार ने अधिकतम सीमा के मुकाबले सिर्फ 60 पैसे प्रति लीटर का सेस लगाया है।
BJP ने किया था विरोध
इस फैसले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने विधवाओं और अनाथ बच्चों के नाम पर ईंधन से राजस्व जुटाने के तरीके पर सवाल उठाया था।
विपक्ष का तर्क था कि सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आम लोगों पर पेट्रोल-डीजल का अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है।
सुक्खू बोले- विरोध नहीं, समर्थन करना चाहिए
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए सरकार के फैसले का बचाव किया था।
उनका कहना था कि सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मजबूत करने के लिए काम कर रही है और यदि अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए कदम उठाया जा रहा है तो विपक्ष को इसका विरोध करने के बजाय समर्थन करना चाहिए।
क्या आगे और बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल का दाम?
कानूनी तौर पर सरकार के पास गुंजाइश है, क्योंकि संशोधन के तहत अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की अनुमति है। हालांकि, अभी सरकार ने केवल 60 पैसे प्रति लीटर का उपकर लगाया है।
इसलिए मौजूदा आदेश को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल पर तुरंत ₹5 का अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। भविष्य में सेस की दर बदलती है या नहीं, यह राज्य सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
एक तरफ बढ़ी कीमत, दूसरी तरफ सामाजिक कल्याण का दावा
हिमाचल सरकार ने इस फैसले को सामाजिक सुरक्षा के लिए संसाधन जुटाने की पहल बताया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल पर नया शुल्क लगने से इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि 60 पैसे प्रति लीटर के इस ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ से सरकार को कितनी अतिरिक्त आय होती है और उस राशि का इस्तेमाल किन योजनाओं में किया जाता है।

