सोने की मूर्ति का लालच, 2 लाख रुपये और फिर हत्या: पुरी में चारपाई से बांधकर जिंदा जलाने के आरोप में 3 गिरफ्तार

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पुरी के कनास इलाके में सोने की मूर्ति के विवाद से जुड़ी हत्या के मामले में पुलिस जांच

पुरी: ओडिशा के पुरी जिले के कनास इलाके में एक 61 वर्षीय व्यक्ति की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर सोने की मूर्ति और छिपे खजाने के नाम पर हुए पैसों के विवाद ने खूनी रूप ले लिया। आरोप है कि तीन लोगों ने परशुराम प्रधान पर हमला किया, उन्हें बांधा और फिर आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, घटना 11 अगस्त की रात कनास थाना क्षेत्र के मंदराबस्ता गांव में हुई। परशुराम का जला हुआ शव दो दिन बाद मिला, जब उनकी पत्नी भुवनेश्वर से घर लौटीं। जांच के बाद पुलिस ने राजकिशोर साहू, सुरेश साहू और सत्यव्रत मल्लिक को गिरफ्तार किया है।

पहले प्रेम संबंध खत्म कराने के लिए दी थी 19 हजार रुपये की रकम

पुलिस जांच के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत एक अलग विवाद से हुई थी। मुख्य आरोपी बताए जा रहे राजकिशोर साहू ने कथित तौर पर अपने छोटे भाई के प्रेम संबंध को खत्म कराने के लिए परशुराम से संपर्क किया था। इसके लिए उसने उन्हें करीब 19 हजार रुपये दिए थे।

पुलिस का कहना है कि जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ तो मामला कथित तौर पर दूसरे लालच से जुड़ गया। परशुराम ने राजकिशोर को बताया कि उसकी जमीन में एक बर्तन दबा है, जिसमें सोने की प्राचीन मूर्ति और अन्य कीमती सामान हो सकता है। इसके बाद राजकिशोर ने कथित तौर पर करीब 2 लाख रुपये दिए।

जमीन खोदी, लेकिन नहीं मिला कथित खजाना

पुलिस के मुताबिक, राजकिशोर को उम्मीद थी कि जमीन से सोने की मूर्ति और गहने मिलने के बाद उसे आर्थिक फायदा होगा। लेकिन बताए गए स्थान पर खुदाई के बावजूद कथित खजाना नहीं मिला।

इसके बाद राजकिशोर ने परशुराम से अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। पुलिस के अनुसार, रकम वापस नहीं मिलने को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और आखिरकार इसी विवाद ने हत्या का रूप ले लिया। पुरी के एसपी प्रतीक सिंह ने मामले की वजह को कथित धोखे, पैसों के विवाद और अंधविश्वास से जुड़ा बताया है।

घर पहुंचे तीन आरोपी, फिर खूनी वारदात

पुलिस के मुताबिक, 11 अगस्त की रात राजकिशोर अपने दो साथियों के साथ परशुराम के घर पहुंचा। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास चाकू, रस्सी और मिर्च पाउडर जैसी चीजें थीं।

पैसे वापस करने को लेकर कथित तौर पर बहस हुई। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान राजकिशोर ने परशुराम पर चाकू से हमला किया। इसके बाद तीनों ने उन्हें बांध दिया और आग लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने यह भी दावा किया है कि घटना को दुर्घटना जैसा दिखाने के लिए मौके पर गैस सिलेंडर रखा गया था। हालांकि, जांच में सिलेंडर विस्फोट के कोई संकेत नहीं मिले।

डिजिटल लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड से खुला मामला

पुलिस के अनुसार, जांच में मृतक के कॉल रिकॉर्ड और ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल अहम साबित हुई। डिजिटल लेनदेन के जरिए पुलिस को परशुराम और मुख्य आरोपी राजकिशोर के बीच पैसों के संबंध का पता चला।

इसके बाद पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ते हुए तीनों संदिग्धों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले में चाकू, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन समेत कुछ सामान जब्त किए जाने की भी जानकारी दी है।

पुलिस के मुताबिक, अंधविश्वास और लालच बना हत्या की वजह

पुरी पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह मामला सिर्फ पैसों के विवाद तक सीमित नहीं था। पुलिस को इसमें अंधविश्वास, कथित धोखे, लालच और बदले की कड़ी दिखाई दे रही है।

हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के आरोपों के आधार पर हुई है और मामले में अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

यह घटना यह भी दिखाती है कि कथित तांत्रिक दावों और छिपे खजाने के लालच में किए गए आर्थिक लेनदेन किस तरह गंभीर विवाद और हिंसा में बदल सकते हैं।

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