सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को ध्वस्त की गई मस्जिद का मलबा हटाने के बाद उसके नीचे एक कुआं मिला है। प्रशासन के अनुसार, कुआं ईंटों से बना हुआ है और फिलहाल इसकी गहराई व निर्माण की उम्र समेत अन्य पहलुओं की जांच की जानी है। सहारनपुर सदर एसडीएम सुबोध कुमार ने कुआं मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि संबंधित तकनीकी एजेंसियां इसकी जांच करेंगी।
कुआं मिलने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इसका निर्माण कब और किस उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से कुएं की ऐतिहासिकता या निर्माण काल को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए इसे मस्जिद या जमीन के इतिहास से जोड़कर किसी तरह का दावा करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
मलबा हटने के बाद सामने आया कुआं
शनिवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्त कर दिया था। अगले चरण में मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे कुएं की संरचना दिखाई दी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार के मुताबिक, पहली नजर में यह कुआं ही प्रतीत हो रहा है और तकनीकी टीम इसकी जांच करेगी।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कुएं की गहराई करीब 20 मीटर/20 फीट बताए जाने को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। प्रशासन की तकनीकी जांच पूरी होने तक इसकी वास्तविक गहराई को लेकर किसी एक आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
अदालत के फैसले के बाद हुई थी मस्जिद पर कार्रवाई
मस्जिद को लेकर विवाद जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता से जुड़ा था। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमाइसेज (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण माना था। आदेश में करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर कब्जे का उल्लेख था और क्षतिपूर्ति भी तय की गई थी।
मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की थी। 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर की सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य यह है कि 2 सितंबर के जिला अदालत के आदेश में सीधे ध्वस्तीकरण का निर्देश नहीं था, बल्कि उसने पहले के बेदखली आदेश को बरकरार रखा था। प्रशासन ने इसी न्यायिक प्रक्रिया के बाद कार्रवाई की।
मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे
मस्जिद की उम्र को लेकर भी विवाद है। शुरुआती रिपोर्टों में इसे करीब 70 साल पुराना बताया गया, जबकि मस्जिद पक्ष और कुछ राजनीतिक नेताओं की ओर से इसे इससे कहीं अधिक पुराना बताया गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया है कि मस्जिद 1911 से पहले की है और जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज होने की बात कही है। इन दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा सपा प्रतिनिधिमंडल
ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने मस्जिद मामले की स्थिति देखने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल 7 सितंबर को सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट परिसर का दौरा करेगा।
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले को आगे अदालत में ले जाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी ध्वस्तीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायिक आदेशों और सरकारी भूमि से अनधिकृत कब्जा हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई।
अब कुएं की जांच से क्या सामने आएगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मस्जिद के नीचे मिला कुआं कितना पुराना है, उसकी वास्तविक संरचना क्या है और उसका मूल उपयोग क्या था। प्रशासन ने संकेत दिया है कि तकनीकी जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
इसलिए कुएं के सामने आने को लेकर किसी ऐतिहासिक या धार्मिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। दूसरी ओर, मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद आगे बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं।

