सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बुधवार को चेतावनी दी कि इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों और वहां पहुंचने वाले जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए ‘रेड लाइन’ है। यह बयान तब आया जब सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे (स्थानीय समय) मक्का के दक्षिण में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से लॉन्च किए गए एक ड्रोन को उसके प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया।
‘मक्का और जायरीनों की सुरक्षा रेड लाइन’
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने इस घटना को ‘दुश्मनी भरा और आतंकवादी कृत्य’ करार दिया और ड्रोन लॉन्च करने वाले संगठन को ‘आतंकवादी हूती मिलिशिया’ बताया। उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा एक रेड लाइन है और गठबंधन की संयुक्त सेना कमान हूती आंदोलन के खिलाफ जरूरी व निवारक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। गठबंधन ने इसे मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश बताते हुए 27 जुलाई 2017 की उस घटना का भी हवाला दिया, जिसमें मक्का की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की बात कही गई थी।
हूतियों ने दावे को बताया ‘झूठ’
हूती राजनीतिक ब्यूरो के हाजिम अल-असद ने रियाद के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे “घिसा-पिटा झूठ” करार दिया, जिस पर अब कोई भरोसा नहीं करता। वहीं हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने मंगलवार को टेलीग्राम पर बयान जारी कर उलटा सऊदी अरब पर हमले करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, पिछले 24 घंटों में सऊदी युद्धक विमानों ने यमन में 52 हवाई हमले किए, जिनमें F-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल हुआ और ताइज प्रांत में स्कूल, पुल और सड़कों जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया। सारी ने अल-जौफ, अल-बायदा, सादा और अमरान प्रांतों में भी हमले किए जाने का दावा किया। इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
57 देशों के संगठन OIC ने की निंदा
57 मुस्लिम देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने इस कथित हमले की कड़ी निंदा की है। गठबंधन के अनुसार, इससे एक दिन पहले सोमवार को हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में सऊदी अरब के खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ शहरों में 13 आम नागरिक घायल हुए थे, जिनमें सात घर और दो वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए बताए जा रहे हैं।
यमन में बढ़ता सैन्य तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यमन में पिछले कुछ हफ्तों से सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में हूतियों ने यमन सरकार समर्थक बलों को पीछे धकेलते हुए लाल सागर तट के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है, जिससे रणनीतिक रूप से अहम बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है। हूती विद्रोहियों ने पहले भी इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है।
बताया जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बीते सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर सैन्य सहायता मांगी थी, हालांकि अब तक यह सहायता मुख्य रूप से खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित बताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एक अमेरिकी सैन्य टास्क फोर्स सऊदी सेनाओं के लिए खुफिया साझेदारी और योजना संबंधी सहायता बढ़ाने पर काम कर रही है। यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम एशिया में जारी व्यापक तनाव के बीच सामने आया है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ता देखा जा रहा है।

