दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बनेगी हाई पावर्ड कमेटी; FIR और पुलिस कार्रवाई की होगी जांच

5 Min Read
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हाई पावर्ड कमेटी बनेगी

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद दर्ज FIR को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी लोगों को सामान्य प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं रखा जा सकता।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी गठित करने का ऐलान किया। कोर्ट ने कहा कि कमेटी के सामने सभी पक्ष अपनी बात रख सकेंगे और प्रदर्शन से जुड़े मामलों, पुलिस कार्रवाई तथा अन्य शिकायतों की जांच की जाएगी।

FIR रद्द करने की मांग, कोर्ट ने मांगी पूरी सूची

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शन से जुड़े सभी FIR रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में अंतर किया जाना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को राहत मिलनी चाहिए।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राहत दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में आरोपी लोगों को सामान्य प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं देखा जा सकता।

एक अन्य वकील सैयद रिजवान ने FIR रद्द करने का विरोध करते हुए कहा कि संसद मार्च गैरकानूनी था और इससे गलत संदेश जा सकता है। कोर्ट ने उनके सुझाव को रिकॉर्ड पर लेने की बात कही।

गंभीर आपराधिक मामलों वालों की होगी अलग जांच

CJI सूर्यकांत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड है, उन्हें छोड़कर बाकी लोगों के खिलाफ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान हत्या, रेप और POCSO जैसे गंभीर अपराधों का भी उल्लेख हुआ। कोर्ट का संकेत था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।

200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा

सुनवाई में पुलिसकर्मियों पर पथराव और हमले का मुद्दा भी उठा। सॉलिसिटर जनरल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए

वहीं प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस बल के कथित दुरुपयोग और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार का मुद्दा उठाया गया। एक वकील ने महिला प्रदर्शनकारियों को ऑनलाइन मिल रही धमकियों और सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जाने की शिकायत भी कोर्ट के सामने रखी।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि पीड़ित कोई भी हो, कोर्ट उनके साथ है और ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

पूर्व जज और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों वाली कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि हाई पावर्ड कमेटी में एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व DGP और पूर्व CBI डायरेक्टर जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है। CJI ने बताया कि कुछ अधिकारियों से कमेटी में शामिल होने के लिए सहमति भी ली जा चुकी है।

कोर्ट ने कहा कि कमेटी केवल एक गोपनीय रिपोर्ट देकर अपना काम खत्म नहीं करेगी। जैसे-जैसे मामले उसके सामने आएंगे, वह उनकी जांच करेगी और समय-समय पर कोर्ट को रिपोर्ट देगी। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम निर्देश भी जारी कर सकेगा।

फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया गया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल भीड़ में शामिल अपराधियों की पहचान के लिए किया गया था।

CJI ने इस मुद्दे को भी कमेटी के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में शामिल करने को लेकर सुझाव देने को कहा।

कल जारी हो सकता है कमेटी के गठन का आदेश

कोर्ट ने सभी पक्षों से कमेटी की संरचना और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर सुझाव मांगे हैं। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि सभी सुझाव आज मिल जाते हैं तो कोर्ट बुधवार को कमेटी के गठन को लेकर आदेश जारी करने का प्रयास करेगा।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख से साफ है कि मामले में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने के साथ-साथ हिंसा और गंभीर आपराधिक आरोपों की निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

Share This Article
Exit mobile version