मथुरा में मानसून की पहली बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, कई रास्ते डूबे; प्रशासन पर फूटा लोगों का गुस्सा

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मथुरा में मानसून की पहली बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, कई रास्ते डूबे; प्रशासन पर फूटा लोगों का गुस्सा

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मानसून ने इस हफ्ते की शुरुआत में दस्तक दे दी है, जिसके चलते भारी बारिश भी देखने को मिल रही है। इसी में मथुरा में हुई भीषण बारिश के चलते आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त होता दिखा। मथुरा में मानसून आने के साथ वहां हुई पहली ही बारिश ने नगर निगम की तैयारियों के सारे दावों को फेल कर दिया और प्रमुख मार्गों पर भारी जलभराव के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नए बस स्टैंड पुल के नीचे, चौक बाजार, द्वारकाधीश मंदिर के आसपास और भूतेश्वर पुल के नीचे सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे यातायात प्रभावित हो गया।

द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को करना पड़ा परेशानी का सामना

मथुरा में हुई भारी बारिश के चलते वहां के प्रमुख मार्गों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाने से दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा जिससे भारी ट्रैफिक भी देखने को मिला। कई वाहन पानी में बंद हो गए जबकि स्कूटी और मोटरसाइकिल जलभराव में बहती जा रही थी जिनको स्थानीय दुकानदारों की मदद से खींच कर सुरक्षित स्थान पर लाया गया। वहीं पैदल राहगीरों और बाजार में आने-जाने वाले लोगों को भी जलभराव की समस्या से काफी दिक्कत हुई। द्वारकाधीश मंदिर क्षेत्र में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को भी जलभराव के कारण परेशानी उठानी पड़ी। मथुरा के नए बस स्टैंड और भूतेश्वर पुल के नीचे पानी भरने से कुछ समय के लिए यातायात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया था। वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा जिससे अन्य मार्गों पर भी जाम की स्थिति देखने को मिली।

हर बारिश में यही हाल होता है

भारी बारिश के चलते सड़कों पर हुए जलभराव को लेकर मथुरा के स्थानीय लोगों का गुस्सा भी प्रशासन पर फूटते हुए देखने को मिला जिसमें उन्होंने कहा कि हर बारिश में यही हाल होता है। नगर निगम की ओर से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की जा रही। नालों की समय पर सफाई नहीं होने और जल निकासी व्यवस्था कमजोर होने के कारण थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं। लोगों ने नगर निगम प्रशासन से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और बरसात से पहले नालों की प्रभावी सफाई कराने की मांग की है। इससे आगे होने वाली बारिश के दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को ऐसी परेशानी का सामना फिर से ना करना पड़े।

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