Triple Murder: बेटे को सजा दिलाने के लिए मां ने लड़ी 4 साल की लड़ाई, हत्यारे भाई के साथ खड़ी हुईं दो बेटियां तो तोड़ा रिश्ता

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Triple Murder: मां ने लड़ी इंसाफ की जंग, दो बहनों ने दिया हत्यारे भाई का साथ तो तोड़ा नाता; ये है पूरी कहानी

बड़ौत: उत्तर प्रदेश के बड़ौत में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद एक मां की चार साल लंबी इंसाफ की लड़ाई पूरी हुई। 62 वर्षीय शशिप्रभा ने अपने ही इकलौते बेटे अमरपाल उर्फ लक्ष्य तोमर को पति और दो बेटियों की हत्या का दोषी साबित कराने के लिए अदालत में पैरवी की। वहीं, उनकी शादीशुदा बेटियां अपने भाई को बचाने के लिए उसके साथ खड़ी हो गईं। मां ने बेटियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं मानीं तो उन्होंने उनसे भी रिश्ता खत्म कर लिया।

अब अदालत द्वारा अमरपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद शशिप्रभा ने कहा कि वह फैसले से संतुष्ट हैं। उनके मुताबिक, उनके पति और दोनों बेटियों को आखिरकार न्याय मिल गया।

14 अगस्त 2022 की रात उजड़ गया था पूरा परिवार

बड़ौत की चौधरान पट्टी की गली नंबर-4 में रहने वाली शशिप्रभा का परिवार 14 अगस्त 2022 की रात पूरी तरह बिखर गया था। गलत संगत से परेशान होकर उन्होंने अपने इकलौते बेटे अमरपाल को घर से बेदखल करने का फैसला लिया था।

लेकिन आरोप है कि इसके बाद अमरपाल ने अपने पिता ब्रजपाल और बहनों अनुराधा व ज्योति की हत्या कर दी। इस तिहरे हत्याकांड ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था।

परिवार में उस समय शशिप्रभा की दो शादीशुदा बेटियां पूजा और आरती ही बची थीं। दोनों की शादी पहले ही क्रमश: कल्याणपुर और जिवाना में हो चुकी थी।

मां ने बेटे को सजा दिलाने के लिए शुरू की पैरवी

पुलिस ने अमरपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामला अदालत में पहुंचने के बाद शशिप्रभा ने अपने पति और दोनों बेटियों की हत्या के मामले में बेटे को सजा दिलाने के लिए खुद पैरवी शुरू कर दी।

उनकी राह तब और मुश्किल हो गई, जब उनकी बेटी पूजा ने अपने भाई अमरपाल को बचाने के लिए कानूनी पैरवी शुरू कर दी। उसकी ओर से अमरपाल की जमानत के लिए भी याचिका दायर की गई, लेकिन अदालत ने जमानत मंजूर नहीं की।

बेटियों ने भाई का साथ दिया तो मां ने तोड़ लिया रिश्ता

शशिप्रभा के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी। एक तरफ उनका इकलौता बेटा था, जिस पर उनके पति और दो बेटियों की हत्या का आरोप था, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी बेटियां उसी बेटे को बचाने के लिए खड़ी थीं।

उन्होंने बेटियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं मानीं तो शशिप्रभा ने उनसे रिश्ता खत्म कर लिया। इसके बाद वह अकेले ही अपने बेटे के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं।

62 साल की उम्र में खुद संभाली खेती

शशिप्रभा ने हार नहीं मानी। 62 साल की उम्र में भी वह अपनी चार बीघा जमीन पर खुद खेती करती रहीं और साथ ही अदालत में पति और बेटियों की हत्या के मामले की पैरवी करती रहीं।

चार साल से ज्यादा समय तक चली इस लड़ाई के बाद बृहस्पतिवार को अदालत ने अमरपाल उर्फ लक्ष्य तोमर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

फैसले के बाद शशिप्रभा ने कहा कि वह न्यायालय के निर्णय से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि उनके पति और दोनों बेटियों को न्याय मिला

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