लेह-लद्दाख में 4 घंटे के भीतर भूकंप के दो झटके, 5.5 की तीव्रता से दहली धरती; घरों से बाहर निकले लोग

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भूकंप के दो बड़े झटकों से कांपी लेह लद्दाख की धरती, घरों से भागे लोग, जानें कितनी थी

लेह: लद्दाख के लेह में गुरुवार सुबह धरती एक बार नहीं, बल्कि दो बार कांपी। करीब चार घंटे के अंतराल में आए दो भूकंप के झटकों ने लोगों में दहशत पैदा कर दी। पहला और सबसे तेज झटका सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 दर्ज की गई। इसके बाद सुबह 9 बजकर 54 मिनट पर 4.3 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया। दोनों भूकंपों की गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई है।

भूकंप के झटके महसूस होते ही कई लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों और सड़कों की ओर चले गए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, लगातार दो झटकों के बाद इलाके में लोगों के बीच आफ्टरशॉक्स को लेकर चिंता बनी हुई है।

सुबह 6:05 बजे आया पहला और सबसे तेज झटका

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, पहला भूकंप गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को सुबह 6:05 बजे आया। इसकी तीव्रता 5.5 और गहराई 10 किलोमीटर थी।

कम गहराई पर आने के कारण भूकंप के झटके सतह पर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस किए जा सकते हैं। यही वजह है कि सुबह-सुबह आए इस झटके से लेह और आसपास के इलाकों में लोगों को तेज कंपन महसूस हुआ।

चार घंटे बाद फिर कांपी धरती

पहले झटके के बाद जब लोगों ने राहत की सांस ली, तो करीब चार घंटे बाद एक और भूकंप ने चिंता बढ़ा दी।

सुबह 9:54 बजे 4.3 तीव्रता का दूसरा भूकंप दर्ज किया गया। इसकी गहराई भी 10 किलोमीटर बताई गई है। दोनों झटके लेह क्षेत्र में दर्ज किए गए।

लगातार दो भूकंप आने के कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।

नींद में ही महसूस हुआ घर का हिलना

सुबह के समय आए पहले झटके ने लोगों को अचानक चौंका दिया। कुछ लोग उस वक्त सो रहे थे, जबकि कुछ अपने रोजमर्रा के काम की तैयारी कर रहे थे।

झटके महसूस होते ही कई लोग घरों से बाहर निकल आए। लोगों ने बताया कि कंपन इतना स्पष्ट था कि घर के भीतर रहते हुए ही उन्हें धरती और आसपास की चीजों के हिलने का एहसास हुआ।

दूसरे झटके के बाद भी लोगों में सतर्कता बढ़ गई और कई लोग आफ्टरशॉक्स की आशंका को लेकर चिंतित दिखाई दिए।

क्या 5.5 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है?

भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाला नुकसान एक ही चीज नहीं है। नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप की गहराई कितनी थी, केंद्र से आबादी कितनी दूर थी, स्थानीय भूगर्भीय स्थिति कैसी थी और इमारतें कितनी मजबूत थीं।

5.5 तीव्रता का भूकंप स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है और कुछ परिस्थितियों में कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन इससे हर स्थिति में बड़े पैमाने पर तबाही होगी, ऐसा कहना सही नहीं है।

लेह में गुरुवार को आए दोनों भूकंप अपेक्षाकृत कम गहराई पर थे, इसलिए उनके झटके लोगों ने अच्छी तरह महसूस किए।

लद्दाख पहले से ही भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र

लद्दाख हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। ऐसे इलाकों में छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप समय-समय पर दर्ज किए जाते हैं।

गुरुवार के दो झटकों के बाद फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की निगाह स्थिति पर बनी हुई है। किसी भी संभावित आफ्टरशॉक या नुकसान की जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

क्या आफ्टरशॉक आ सकते हैं?

किसी भूकंप के बाद आफ्टरशॉक आना संभव है, लेकिन पहले से यह निश्चित तौर पर नहीं बताया जा सकता कि वे कब आएंगे, कितनी संख्या में होंगे या उनकी तीव्रता कितनी होगी।

इसलिए विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही रहती है कि शुरुआती झटकों के बाद लोग घबराने के बजाय सतर्क रहें, क्षतिग्रस्त इमारतों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

फिलहाल राहत की खबर

लगातार दो भूकंपों ने लेह-लद्दाख के लोगों को जरूर डरा दिया, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि किसी जनहानि या बड़े संपत्ति नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

पहला झटका 5.5 और दूसरा 4.3 तीव्रता का था। दोनों की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

भूकंप के बाद अगर किसी इमारत में दरार, संरचनात्मक नुकसान या गैस/बिजली से जुड़ी समस्या दिखाई दे तो उसके अंदर जाने से बचना चाहिए और स्थानीय प्रशासन को तुरंत सूचना देनी चाहिए।

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