Uber में बड़ी छंटनी: 10% ग्लोबल वर्कफोर्स घटाएगी कंपनी, करीब 3,300 नौकरियों पर संकट; भारत में भी असर

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Uber में बड़ी छंटनी: 10% ग्लोबल वर्कफोर्स घटाएगी कंपनी, करीब 3,300 नौकरियों पर संकट; भारत में भी असर

दिग्गज राइड-हेलिंग कंपनी Uber ने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में करीब 10 फीसदी की कटौती का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से लगभग 3,300 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने की संभावना है। Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में कहा कि कंपनी संगठन को सरल बनाने, मैनेजमेंट की परतें कम करने और फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह बदलाव कर रही है।

Uber ने कहा है कि जिन कर्मचारियों की भूमिकाएं प्रभावित हुई हैं, उनमें से ज्यादातर को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। कुछ देशों में स्थानीय श्रम नियमों के कारण आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सूचित किया जाएगा। कंपनी के 2025 के वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक उसके पास करीब 34,000 कर्मचारी थे, इसलिए 10 फीसदी की कटौती लगभग 3,300 से 3,400 पदों के बराबर बैठती है।

क्यों की जा रही है इतनी बड़ी छंटनी?

खोसरोशाही के मुताबिक पिछले पांच से अधिक वर्षों में Uber का कारोबार तेजी से बढ़ा है। कंपनी का रेवेन्यू लगभग तीन गुना हुआ और इस दौरान उसने नए प्रोडक्ट, कारोबार और बाजार जोड़े। लेकिन इस विस्तार के साथ संगठन में मैनेजमेंट की कई परतें, ज्यादा समन्वय और जिम्मेदारियों का बंटवारा भी जटिल होता गया।

कंपनी अब इस ढांचे को छोटा और सरल बनाना चाहती है। Uber ने बताया कि CEO से सात या उससे अधिक स्तर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में करीब 20 फीसदी की कमी की गई है। इसके अलावा ऐसे ‘माइक्रो-टीम्स’, जिनमें मैनेजर के साथ केवल एक या दो कर्मचारी होते हैं, उनकी संख्या भी करीब आधी की जा रही है।

कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य कर्मचारियों को केवल समन्वय और मीटिंग्स में समय बिताने के बजाय प्रोडक्ट, ग्राहकों और कारोबार से जुड़े काम पर ज्यादा समय देने का मौका देना है। Uber ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फैसला कर्मचारियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर नहीं लिया गया है, बल्कि संगठनात्मक ढांचे में बदलाव का हिस्सा है।

भारत में भी कर्मचारियों पर पड़ा असर

भारत भी इस restructuring से अछूता नहीं रहा है। Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 200 से 250 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, ऑपरेशंस समेत अलग-अलग विभागों के कर्मचारी और मैनेजमेंट स्तर के लोग शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, Uber ने भारत को महत्वपूर्ण बाजार और ग्लोबल हब के तौर पर बनाए रखने की बात कही है। कंपनी भारत में अपने टेक्नोलॉजी और बिजनेस ऑपरेशंस के साथ-साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मोबिलिटी कारोबार पर भी काम जारी रखेगी।

ज्यादातर रिमोट कर्मचारियों को ऑफिस लौटना होगा

छंटनी के साथ Uber ने अपनी वर्क लोकेशन स्ट्रैटेजी में भी बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ग्लोबल टीमों को न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को जैसे प्रमुख हब में केंद्रित करेगी, जबकि क्षेत्रीय और स्थानीय टीमों को निर्धारित रीजनल या कंट्री हब में रखा जाएगा।

कंपनी ने ज्यादातर रिमोट कर्मचारियों से ऑफिस लौटने को कहा है। आगे चलकर Uber के केवल करीब 1 फीसदी कर्मचारी ही पूरी तरह रिमोट रहेंगे। कंपनी की हाइब्रिड वर्क पॉलिसी के तहत कर्मचारियों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन ऑफिस से काम करना होगा।

क्या AI की वजह से हुई छंटनी?

इस छंटनी की घोषणा ऐसे समय हुई है जब टेक इंडस्ट्री में AI और ऑटोमेशन को नौकरियों में कटौती से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, Uber के CEO ने इस बार AI को छंटनी की वजह नहीं बताया है। कंपनी की आधिकारिक व्याख्या संगठन को सरल बनाने, मैनेजमेंट की परतें कम करने और भविष्य के विकास व इनोवेशन में संसाधन लगाने पर केंद्रित है।

महामारी के बाद Uber की सबसे बड़ी छंटनी

करीब 3,300 नौकरियों की यह कटौती महामारी के बाद Uber की सबसे बड़ी workforce reduction मानी जा रही है। इससे पहले मई 2020 में कोविड-19 के दौरान कंपनी ने करीब 6,700 कर्मचारियों की छंटनी की थी।

Uber का कहना है कि मौजूदा बदलाव से होने वाली बचत को कंपनी ग्रोथ, इनोवेशन और भविष्य की तकनीकों में दोबारा निवेश करेगी। यानी कंपनी का तर्क कारोबार कमजोर होने के बजाय संगठन को ज्यादा चुस्त बनाकर भविष्य के अवसरों के लिए संसाधन तैयार करना है।

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