लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने जेन-जी और जेन-अल्फा के सामने रोजगार समेत अन्य समस्याओं को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं को इन मुद्दों को लेकर होने वाले धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों से दूर रहने का निर्देश दिया है। मायावती ने पार्टी संगठनों से युवाओं की जायज समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करने को कहा है।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि देश में ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं, जिनसे यह धारणा बन रही है कि युवाओं और बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर शुरू हुए आंदोलन अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रभाव में आ रहे हैं। उनके मुताबिक, इससे युवाओं और छात्रों के आंदोलनों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन के राजनीतिक रंग पर उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान युवाओं और छात्रों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे। अब आंदोलन के स्वतंत्र स्वरूप के बजाय उसके राजनीतिक रंग लेने को लेकर शंकाएं पैदा हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों की वास्तविक एवं जरूरी मांगों के प्रति बसपा की हमेशा सहानुभूति और चिंता रही है। मायावती ने पार्टी के राज्य संगठनों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संबंधित अधिकारियों से मिलकर जेन-जी और जेन-अल्फा की समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करें।
मायावती इससे पहले भी युवाओं के आंदोलनों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। अगस्त में उन्होंने आरोप लगाया था कि विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं के आंदोलनों को अपने राजनीतिक और चुनावी हितों के लिए प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं को धरना-प्रदर्शन से दूर रहने का निर्देश
मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से पार्टी अनुशासन का पालन करते हुए धरना, प्रदर्शन और आंदोलनों में शामिल नहीं होने को कहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपनी ऊर्जा और संसाधनों को आगामी चुनाव की तैयारियों के लिए सुरक्षित रखने की अपील की।
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य चुनाव के माध्यम से ऐसी सरकार बनाना है, जो बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों को साकार करने और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना के साथ काम करे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में बसपा की चार सरकारों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उनके कार्यकाल में सामाजिक हित और जनकल्याण से जुड़ी नीतियों को लागू किया गया।
संजय आजाद प्रकरण में सख्त कार्रवाई की मांग
मायावती ने जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान संजय आजाद के साथ हुई घटना को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई की होती तो ऐसी गंभीर घटना नहीं होती।
उन्होंने मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और कहा कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर बसपा ऐसे मामलों में पीछे नहीं रहेगी।
संजय आजाद प्रकरण में हाल के दिनों में कार्रवाई की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हुई हैं। 4 सितंबर को मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर सीजेपी के पदाधिकारी संसद मार्ग थाने पहुंचे थे, जबकि 5 सितंबर को कुछ संगठनों ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के विरोध में पुलिस से शिकायत की।
युवाओं की समस्याओं पर बसपा का फोकस
मायावती का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब जेन-जी से जुड़े रोजगार, शिक्षा और अन्य मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। अगस्त के अंत में प्रयागराज में भी जेन-जी से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता की खबरें सामने आई थीं।
बसपा प्रमुख ने एक ओर युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास करने की बात कही है, वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं को सड़क पर होने वाले आंदोलनों से दूर रहने को कहा है। ऐसे में उनका रुख युवाओं के मुद्दों पर समर्थन और पार्टी कार्यकर्ताओं की चुनावी प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

