UP: भीषण गर्मी में दुधारू पशुओं पर आया संकट, बचाव के लिए तुरंत अपनाएं ये उपाय; वरना होगा भारी नुकसान

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UP: भीषण गर्मी में दुधारू पशुओं पर आया संकट, बचाव के लिए तुरंत अपनाएं ये उपाय; वरना होगा भारी नुकसान

इन दिनों गर्मी और लू का असर अब दुधारू पशुओं पर साफ दिखाई देने लगा है। तापमान बढ़ने के साथ ही पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ रही है, जिससे दूध उत्पादन में 10 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के पशुपालन विशेषज्ञ धर्मेंद्र सिंह के अनुसार अधिक गर्मी के कारण पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, वे हांफने लगते हैं हीट स्ट्रेस में आ जाते है और चारा भी कम खाते हैं।

इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है। साथ ही दिल की धड़कन और रक्तचाप बढ़ने के अलावा प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। विदेशी और संकर नस्ल के पशु इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि पशुओं को सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक चराने के लिए न ले जाएं और उन्हें तनावमुक्त वातावरण प्रदान करें। इसके अलावा, पशुशाला को ठंडी और हवादार रखना बेहद जरूरी है। छत पर सफेद पेंट या घास-फूस का उपयोग करने के साथ पंखे, कूलर या फॉगर्स लगाए जा सकते हैं। पशुओं को तेज धूप और लू से बचाने के लिए छायादार स्थान की व्यवस्था करना आवश्यक है।

पानी की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी
धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि गर्मी में पशुओं को दिन में 3–4 बार साफ और ठंडा पानी देना चाहिए। एक दुधारू पशु को प्रतिदिन करीब 60 से 80 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। पानी के बर्तनों की नियमित सफाई भी जरूरी है ताकि संक्रमण से बचाव हो सके। संतुलित आहार से बढ़ेगा उत्पादन धर्मेंद्र सिंह के अनुसार पशुओं के आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण और विटामिन का संतुलित मिश्रण होना चाहिए। सूखा, हरा चारा और दाना तीनों का उचित अनुपात जरूरी है। हरे चारे को काटकर या कुट्टी बनाकर खिलाने से उसकी पाचन क्षमता बढ़ती है।

घर पर ऐसे बनाएं संतुलित पशु आहार
धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि किसान 100 किलोग्राम संतुलित राशन तैयार करने के लिए 31 किलो अनाज, 33 किलो खली, 33 किलो चोकर, 2 किलो खनिज मिश्रण और 1 किलो नमक का उपयोग कर सकते हैं। सभी सामग्री को पीसकर अच्छी तरह मिलाने से पौष्टिक आहार तैयार होता है, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है। स्वास्थ्य देखभाल भी जरूरी पशुओं का नियमित टीकाकरण और डीवॉर्मिंग कराना चाहिए। मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रोलाइट्स व विटामिन सी व ई दें। अधिक दूध देने वाले पशुओं पर विशेष ध्यान दें और हीट स्ट्रेस के लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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