आगरा के थाना खंदाैली क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे पर कंबल में लिपटे मिले शव की शिनाख्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से शिनाख्त महोबा की सोनाली के रूप में हो गई। आरोपी सनी पुलिस हिरासत में है। यह पहली घटना नहीं थी, जब किसी युवती का शव हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर फेंका गया। वर्ष 2020 से 2022 तक 17 महीनों में 1 महिला और 4 युवतियों की हत्या कर शव फेंके गए थे, जो अब तक राज बने हुए हैं। पुलिस अब तक उनकी शिनाख्त ही नहीं करा सकी।
पुलिस इनमें फाइनल रिपोर्ट भी लगा चुकी है। सवाल एक ही बना हुआ आखिर मरने वाली महिला और युवतियां काैन थीं? थाना सिकंदरा, खंदाैली और एत्मादपुर में हाईवे और यमुना एक्सप्रेस-वे पड़ते हैं। इन दोनों मार्ग पर ही सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर हैं। रात में पुलिस की गश्त नहीं रहती है। इसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
इन जगहों पर मिले थे शव
– 14 दिसंबर 2020 को सिकंदरा क्षेत्र में गांव बाबरपुर के पास हाईवे पर सड़क किनारे 60 वर्षीय महिला का शव मिला था। उसके सिर में चोट का निशान था।
– 6 फरवरी 2021 को यमुना एक्सप्रेस-वे पर खंदौली क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास 25 वर्षीय युवती का शव मिला था। हत्या कर शव को जलाने की कोशिश भी की गई थी।
– 27 मई 2021 को सिकंदरा क्षेत्र में अंसल कोर्ट यार्ड के पास जंगल में 25 वर्षीय युवती का शव मिला था। हत्या के बाद शव को जलाने की कोशिश की गई थी। शव राजस्थान से लाकर फेंके जाने की आशंका थी।
– एत्मादपुर में ही 4 जून 2021 को यमुना एक्सप्रेस-वे पर झरना नाले के पुल के नीचे युवती का शव मिला था। उसके हाथ बंधे हुए थे। वो बेडशीट में लिपटी हुई थी।
– 5 अप्रैल 2022 को एत्मादपुर में बरहन मार्ग पर गांव संवाई से एक किलोमीटर दूर बोरे में बंद युवती का शव मिला था। हत्या के बाद शव को रजाई और चटाई में बंद कर बोरे में फेंका गया था।
पहचान के लिए एआई की लेंगे मदद
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि वर्तमान में पुलिस इस तरह के मामलों में एआई की मदद ले रही है। मृतकों के फोटो को साफ करने के बाद पहचान कराई जाती है। इन केस में संबंधित थानों से जानकारी ली जाएगी। मृतकों के फोटो लिए जाएंगे। अगर फोटो साफ होंगे तो एआई की मदद से पहचान के प्रयास होंगे। यह भी देखा जाएगा कि विवेचकों ने पहचान के लिए क्या प्रयास किए? कहां-कहां गए? देखा जाएगा कि क्यों पहचान नहीं हो सकी? इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। अज्ञात शव मिलने पर डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (डीसीआरबी) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से भी फोटो का मिलान कराया जाता है। पहचान नहीं होने पर पोस्टर चस्पा कराए जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी फोटो शेयर किया जाता है।

