यूपी के कासगंज जिले में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। घर के मुखिया ने पत्नी और तीन बच्चों मारकर खुद भी जान दे दी। रविवार को जब शव गांव पहुंचे तो चीत्कार मच गया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। अंतिम संस्कार के दाैरान हर किसी की आंखें नम हो गईं।
कासगंज के अमांपुर के एक परिवार के पांच लोगों के शव एक घर में मिले थे। दिल दहलाने वाली घटना पर मौके पर पहुंची पुलिस के मुताबिक घर के मुखिया ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों की जान लेने के बाद फंदे पर लटकर अपनी जान दे दी। रविवार सुबह पांचों के शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया।
अमांपुर में गुप्ता पेट्रोल पंप के पास एक मकान में वेल्डिंग का काम करने वाले 50 वर्षीय सत्यवीर परिवार के साथ रहते थे। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि 8 साल से गैस वेल्डिंग का काम करने वाला सत्यवीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसके पिता नेम सिंह गांव में ही चक्की चलाते हैं। डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि वेल्डिंग का काम करने वाले सत्यवीर ने पहले अपने तीनों बच्चों को जहर देकर मारा, फिर चाकू से पत्नी का गला रेता। उसके बाद खुद फंदा लगा लिया। इस घटना के बाद पूरे कस्बे में सनसनी फैल गई।
पड़ोसियों और परिजन से बातचीत के बाद डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि इस वारदात के पीछे प्रथम दृष्टया आर्थिक तंगी का कारण सामने आया है। परिवार के लोगों की मौत तीन दिन पहले हुई है। घटना से पहले मृतक मुखिया ने घर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए और एक दरवाजे पर ताला भी लगा दिया।
घटना में सत्यवीर, उसकी पत्नी रामश्री (40), उसकी बड़ी बेटी प्राची (14), आकांक्षा (13) एवं बेटा गिरीश (10) के शव पुलिस ने बंद घर से बरामद किए। शनिवार शाम साढ़े छ: बजे बंद घर में परिवार के मुखिया सत्यवीर व अन्य परिजनों के मृत होने की सूचना पुलिस मिली। पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। चूंकि घर अंदर से बंद था इसलिए पुलिस प्रवेश नहीं कर सकी। इस पर एसपी ने फॉरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड को मौके पर भेजा और वीडियोग्राफी कराकर बंद मकान का दरवाजा कटवाया।
घर के अंदर सत्यवीर का शव छत के कुंदे पर साड़ी के फंदे पर लटका मिला जबकि पत्नी रामश्री का शव दूसरे स्थान पर पड़ा हुआ था उसके गले पर निशान भी पाया गया। दोनों बेटी और बेटे के मुंह से झाग निकल रहे थे। बड़ी बेटी प्राची के मुंह से खून भी निकला था। पुलिस के मुताबिक विषाख्त पदार्थ खिलाकर बच्चों की जान ली। पड़ोसियों ने बताया कि सत्यवीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और उसका घर भी इस तरह की गवाही दे रहा था। उसके घर का चूल्हा बुझा पड़ा था। आस पास बर्तन भी दिखाई नहीं दिए। वहीं कुछ लोगों ने यह भी बताया कि सत्यवीर के बेटा गिरीश पिछले काफी समय से बीमार चल रहा था। जिसके कारण न वह धंधा कर पा रहा था और वह आर्थिक बोझ से दबा हुआ था।
पोस्टमार्टम के बाद रविवार को शव अमांपुर के गांव नगला भोजराज पहुंचे तो चीत्कार मच गया। शवों को फकौता कंपोजिट विद्यालय के पास एक आम के बाग में रखवाया गया। गांव में शव पहुंचने की सूचना पर बड़ी संख्या ग्रामीण जुट गए। फाकोता, टिकुरिया, नगला गुलरिया समेत आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच गए। तीन बच्चों के शवों को खेत के पास तालाब के किनारे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफनाया गया। वहीं सत्यवीर और उसकी पत्नी रामश्री के शव का अंतिम संस्कार किया गया। दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।

