मथुरा में राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आईं हैं। 18 विभागों से मिले डाटा के मिलान में 74,156 राशन कार्डधारक अपात्र पाए गए हैं। इसके बाद बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इन पर कार्रवाई की तैयारी की है।
जिला आपूर्ति अधिकारी संजीव सिंह ने बताया कि राशन कार्ड धारकों की पात्रता की आयकर, परिवहन, राजस्व और अन्य विभागों से जांच कराई। इसमें सामने आया कि हजारों कार्डधारकों के पास चार पहिया, दोपहिया वाहन, कोठी, पांच एकड़ से अधिक जमीन व निर्धारित सीमा से अधिक आय है। इसके बावजूद वह फ्री के दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल ले रहे हैं।
वर्तमान में जिले में कुल 4,69,405 राशन कार्डधारक हैं। इनमें पात्र गृहस्थी के 1,46952 और अंत्योदय के 10,892, शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में पात्र गृहस्थी के 2,81017 और 30,544 अंत्योदय के लाभार्थी हैं। तहसील स्तर पर टीम गठित कर इनकी जांच कराई जा रही है। अभी तक 74,156 कार्ड धारकों में 22,566 लोगों को जांच में अपात्र घोषित किया जा चुका है। वहीं 51590 कार्ड धारकों की जांच अभी जारी है। सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की भी जांच की जाएगी।
इनका होना है सत्यापन
सत्यापन के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख से अधिक वार्षिक आय वाले 18,804 और शहरी क्षेत्र में तीन लाख से अधिक आय वाले 17,814 लोग चिह्नित किए गए। सालाना 25 लाख से अधिक टर्न ओवर वाले 119, खुद का रोजगार चलाने वाले 1593, दूसरे जिले के कार्डधारक 11,868, दूसरे राज्यों के कार्डधारक 426 लोग शामिल हैं। इसके अलावा 9,008 वाहन स्वामी, 5,225 पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले। 6 से 12 महीने के बीच राशन नहीं लेने वाले 7406, एक साल से अधिक समय से राशन नहीं लेने वाले 1301 कार्डधारक भी जांच के दायरे में आए हैं।
ये होती है प्रक्रिया
जिले में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय दो प्रकार के राशन कार्ड बनते हैं। पात्र गृहस्थी का राशन बनवाने के लिए शहरी क्षेत्र में 3 लाख रुपये सालाना से आय कम होनी चाहिए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में 2 लाख रुपये सालाना से आय कम होनी चाहिए। घर में सरकारी नौकरी नहीं हो, पांच एकड़ से अधिक जमीन नहीं हो, पांच किलोवाट से अधिक का जनरेटर और चार पहिया वाहन नहीं हो। ऐसे लोगों को प्रति यूनिट 2 किलोग्राम गेहूं और 3 किलोग्राम चावल मिलते हैं। अंत्योदय कार्ड बनवाने के लिए दिव्यांग, निराश्रित विधवा, निर्धन और अनाथ बच्चे, किसी बीमारी से ग्रसित और निराश्रितों को प्राथमिकता दी जाती है। इनको 21 किलोग्राम चावल और 14 किलोग्राम गेहूं मिलता है।

