UP: ‘आपके खाते से हुई टेरर फंडिंग’, ये सुनते ही डर गए रिटायर्ड कर्मचारी, पुलिस की चेतावनी के बावजूद हो गई ठगी

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UP: ‘आपके खाते से हुई टेरर फंडिंग’, ये सुनते ही डर गए रिटायर्ड कर्मचारी, पुलिस की चेतावनी के बावजूद हो गई ठगी

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त कर्मचारी को खाते से टेरर फंडिंग करने और पीएफआई जैसे संगठन से जुड़ा होने का डर दिखाया गया। तीन दिन तक कई-कई बार वीडियो कॉल पर बात की। इसके बाद खाते में 17.75 लाख रुपये जमा करा लिए। ठगी का पता चलने पर पुलिस से शिकायत की। मामले में 22 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सैनिक नगर, राजपुर चुंगी निवासी कुंदन सिंह (65) दूर संचार विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके एक सिम कार्ड लिया गया है। इसका प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों में किया गया है। इतना ही नहीं उनको यह भी बताया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में एक खाता खुलवाया गया है, जिसमें लगभग ढाई करोड़ रुपये की टेरर फंडिंग की गई है।

इसके बाद दूसरे नंबर से कॉल आया और गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। आरोपी खुद को पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर लगातार पीड़ित को डराते रहे। 15 अप्रैल को खाते में 17.75 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। चाैंकाने वाली बात ये है कि आरोपी पीड़ित से काॅल पर लगातार बात करते रहे। जब तक वह बैंक नहीं पहुंच गए, तब तक खाता नंबर नहीं दिया। वीडियो काॅल पर बैंक पहुंचने की पुष्टि करने के बाद व्हाट्सएप पर खाता नंबर भेजा। रकम को वापस पाने के लिए तीन लाख और मांगने लगे। इससे उन्हें शक हुआ और परिजन को जानकारी दी।
 
पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह का कहना है कि जिन खातों में यह रकम ट्रांसफर की गई है, उनकी गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये खाते किसके नाम पर खोले गए थे और इन खातों का इस्तेमाल किन अन्य गतिविधियों के लिए किया गया। आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
डीसीपी पश्चिमी जोन ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट और टेरर फंडिंग जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठने का तरीका है। ऐसे मामलों में लोग किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर विश्वास न करें। तुरंत पुलिस से संपर्क करें। किसी भी प्रकार के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। व्यक्तिगत जानकारी और वित्तीय विवरण साझा न करें। कानूनी रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती है। यह सिर्फ साइबर अपराधी ठगने के लिए बोलते हैं। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर साइबर क्राइम के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
ठगी गई रकम वापस लाना आसान नहीं
डिजिटल अरेस्ट का शहर में यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में शिक्षिका, चिकित्सक और कारोबारी ऐसी ठगी का शिकार हो चुके हैं। 95 लाख रुपये तक रकम एक बार दे चुके हैं। पुलिस प्राथमिकी तो दर्ज कर लेती हैं। मगर इस रकम को वापस ला पाना आसान नहीं होता है। साइबर अपराधी पकड़े भी जाएं लेकिन उनके खातों में रकम नहीं मिलती है।

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