UP: संकेतों की भाषा की चुनौतियों के खुली संभावनाओं की नई राह, अब खुलेंगे सरकारी नौकरी के रास्ते

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UP: संकेतों की भाषा की चुनौतियों के खुली संभावनाओं की नई राह, अब खुलेंगे सरकारी नौकरी के रास्ते

आगरा में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय मूक-बधिर बैडमिंटन एवं टेबल टेनिस प्रतियोगिता ने विशेष खिलाड़ियों के खेल भविष्य को नई दिशा दे दी है। डेफ स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश व आगरा एसोसिएशन ऑफ डेफ के तत्वावधान में हुए। इस आयोजन ने न केवल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा का मंच दिया, बल्कि आयोजकों को भी कई अहम अनुभव सौंपे।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मूक-बधिर खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ भागीदारी की। संकेतों की भाषा में संवाद,चेहरे के भावों में जोश और खेल के प्रति समर्पण ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कई मुकाबले बेहद रोमांचक रहे और खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

कम्युनिकेशन गैप बना सबसे बड़ी चुनौती:

हालांकि प्रतियोगिता के दौरान आयोजकों को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी कम्युनिकेशन को लेकर आई। सांकेतिक भाषा के जानकार स्वयंसेवकों की सीमित संख्या और सूचनाओं के सही समय पर संप्रेषण में आई बाधाओं के कारण भ्रम की स्थिति बनी रही।

एक उदाहरण ने इस कमी को उजागर कर दिया। पराजय के बावजूद कम्युनिकेशन गैप के चलते मिलते-जुलते नाम वाले खिलाड़ी की जगह दूसरे खिलाड़ी ने मैच खेल लिया। बाद में स्थिति स्पष्ट होने पर इसे दुरुस्त किया गया। हालांकि इस घटना ने आयोजकों को यह सिखा दिया कि भविष्य में बेहतर समन्वय, स्पष्ट घोषणा प्रणाली और प्रशिक्षित दुभाषियों की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

अनुभव बना सबसे बड़ी उपलब्धि

आयोजन से जुड़े राष्ट्रीय खिलाड़ी विजय कुमार ने बताया कि यह प्रतियोगिता आगरा के लिए ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर मूक-बधिर खिलाड़ियों के लिए मंच तैयार किया गया, जिससे शहर के खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। कहा कि कमियां जरूर रहीं, लेकिन यह हमारे लिए सीख है। अब लगातार शहर में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इससे मूक-बधिर खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी के अवसर भी मिल सकते हैं। ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकेंगे।

खिलाड़ियों में बढ़ा उत्साह

प्रतियोगिता के बाद खिलाड़ियों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई अभिभावकों ने कहा कि यदि प्रशासन और समाज का सहयोग मिले तो आगरा मूक-बधिर खेलों का मजबूत केंद्र बन सकता है। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकतीं। चुनौतियों के बीच आयोजित यह प्रतियोगिता न केवल खेल का उत्सव बनी, बल्कि शहर के लिए एक नई शुरुआत भी साबित हुई। आने वाले समय में यदि नियमित आयोजन और बेहतर संसाधन मिलते हैं, तो आगरा के मूक-बधिर खिलाड़ी राज्य और देश स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं।

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