आगरा: उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों के लिए अनिवार्य व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) अब ट्रांसपोर्टरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। आगरा के ट्रांसपोर्टरों ने पड़ोसी राज्यों की तुलना में VLTD की अधिक कीमत और डिवाइस लगने के बाद वाहन पोर्टल पर मैपिंग नहीं होने की शिकायत की है। मामले में आगरा के जिलाधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर VLTD की कीमत निर्धारित करने और तकनीकी विसंगतियां दूर करने की मांग की है।
यूपी परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक VLTD व्यवस्था के तहत वाहनों की लोकेशन को रियल टाइम ट्रैक किया जाता है और डिवाइस को विभागीय सिस्टम से इंटीग्रेट किया जाता है।
5 हजार से 24 हजार रुपये तक कीमत का दावा
आगरा टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिनव गुप्ता ने VLTD की कीमतों में अंतर पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में इसी तरह का उपकरण करीब 5 हजार रुपये में लगाया जा रहा है, जबकि आगरा में अलग-अलग वाहनों के लिए इसकी कीमत काफी अधिक बताई जा रही है।
उनके अनुसार, सात सीट वाले टोयोटा वाहन में VLTD लगाने के लिए करीब 24 हजार रुपये, जबकि मारुति के वाहन में करीब 14 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। उन्होंने कीमतों में इस अंतर को लेकर आरटीओ और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है।
हालांकि, अलग-अलग वाहनों और अधिकृत डिवाइस की तकनीकी विशिष्टताओं के कारण कीमतों में अंतर के कारणों की आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन कीमतों को फिलहाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से बताए गए आंकड़ों के रूप में देखा जाना चाहिए।
एक हजार वाहनों में लग चुका है VLTD
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक आगरा जिले में अब तक करीब एक हजार व्यावसायिक वाहनों में VLTD लगाया जा चुका है। समस्या केवल डिवाइस की कीमत तक सीमित नहीं है। कई वाहन मालिकों की शिकायत है कि VLTD लगने के बाद वाहन पोर्टल पर इसकी स्वीकृति और मैपिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
इस वजह से फिटनेस प्रमाणपत्र और परमिट के नवीनीकरण जैसे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। वाहन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण खड़े रहते हैं और लंबे समय तक संचालन नहीं कर पाने पर चालान या अन्य कार्रवाई का जोखिम भी ट्रांसपोर्टरों को परेशान कर रहा है।
मैपिंग नहीं हुई तो अटक रहे जरूरी काम
VLTD व्यवस्था में डिवाइस को वाहन के साथ सही तरीके से मैप और एक्टिवेट करना जरूरी है। यूपी की आधिकारिक VLT प्रणाली में वाहन ट्रैकिंग, डिवाइस एक्टिवेशन और वाहन से संबंधित मैपिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जमीन पर डिवाइस लगवाने के बाद भी यदि पोर्टल पर मैपिंग और स्वीकृति नहीं होती है तो VLTD लगाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। उनका आरोप है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण वाहन मालिकों को अनावश्यक रूप से आरटीओ कार्यालय और संबंधित एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ट्रांसपोर्टरों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से VLTD व्यवस्था में कई सुधार करने की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से:
- VLTD की एक समान और पारदर्शी दर निर्धारित की जाए।
- अधिक संख्या में कंपनियों को अधिकृत किया जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े।
- डिवाइस लगने के बाद वाहन पोर्टल पर मैपिंग और स्वीकृति की प्रक्रिया सुचारु की जाए।
उनका कहना है कि इससे वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और फिटनेस व परमिट संबंधी काम भी समय पर हो सकेंगे।
DM ने शासन को लिखा पत्र
ट्रांसपोर्टरों की शिकायतों को देखते हुए आगरा के जिलाधिकारी ने शासन को पत्र भेजा है। इसमें VLTD की कीमत निर्धारित करने के साथ-साथ सामने आ रही विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई है।
एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार ने बताया कि समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि ट्रांसपोर्टरों की तकनीकी और प्रक्रियागत दिक्कतों का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
व्यवस्था का उद्देश्य क्या है?
VLTD का उद्देश्य व्यावसायिक और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की लोकेशन को तकनीक के माध्यम से ट्रैक करना और आपात स्थिति में बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है। यूपी परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार VLTD से वाहन की लोकेशन रियल टाइम में उपलब्ध होती है और यह व्यवस्था वाहन ट्रैकिंग तथा आपातकालीन अलर्ट सिस्टम से जुड़ी है।
लेकिन आगरा के ट्रांसपोर्टरों की शिकायतों से यह सवाल सामने आया है कि तकनीकी निगरानी की इस व्यवस्था को लागू करते समय डिवाइस की लागत, अधिकृत विक्रेताओं की उपलब्धता और मैपिंग जैसी जमीनी समस्याओं को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अब जिलाधिकारी के पत्र के बाद शासन स्तर पर कीमत और मैपिंग की समस्या को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर ट्रांसपोर्टरों की नजर है।

