सपा विधायक समरपाल सिंह विधान सभा में बीजेपी विधायक के साथ एक किस्सा सुनाया। कहा- हमने एक ढाबे पर पनीर मंगा लिया। बीजेपी विधायक ने खाने से मना कर दिया। कहा कि सब नकली है। हमने कहा कि सरकार तो आपकी है, बंद क्यों नहीं करवाते। वह बोले- नकली बंद हो जाएगा तो असली दूध 150 रुपए लीटर हो जाएगा।
यूपी कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों में तीखी झड़प
बजट पर चर्चा के दौरान कल शाम को मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों में तीखी बहस हुई। विरोध करते हुए सपा कार्यकर्ता वेल में आ गए। इस बीच सपा विधायकों ने मंत्री के हाथ से कागज छीने। इस दौरान सपा और निषाद पार्टी के विधायकों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री हमले की कोशिश बताते हुए पीठ से शिकायत की।
ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं
डॉ. निषाद ने बजट की तारीफ करने के बाद सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला किया। निषाद समुदाय ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से इन बेईमानों (कांग्रेस) से भी लड़ रहे हैं। ये जो दाहिने बैठे हैं (सपा के लोग) इन्होंने 30 साल की सत्ता में एक रुपया भी नहीं दिया मछुआ समाज के लिए। केंद्र सरकार ने 67 साल में पूरे देश में 3000 करोड़ रुपये दिए। यूपी ने तो एक रुपया भी नहीं दिया। एक मंत्री बनाकर बैठाया था। हमारे विभाग में एक मछुआ पद हुआ करता था उसे उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया। निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है। ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं।
नौकरी लूटी, रोजी लूट ली
टोकाटाकी के बीची मंत्री नहीं रुके और वह बोलते गए। पिछली सरकारों ने नौकरी लूटी। रोजी रोटी लूट ली। केवटवा, मल्लावा और बिंदवा कह कर मारा जाता था। गोरखपुर में हमने आंदोलन किया। हमारे समाज ने हमें यहां भेजा है कि जाओ और इन लोगों का पर्दाफाश करो। डॉ. निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने वक्तव्य के दौरान इस्तेमाल किए गए जातिसूचक शब्द की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अपने नेता से कहिए कि माफी मांगें। अगर नहीं मांगते हैं तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा। उन्होंने जो जातिसूचक शब्द कहे वह सम्मानित शब्द है।
सपा सदस्यों के वेल में आने पर लगातार पीठ की तरफ से मंत्री को निर्देश दिए जाते रहे कि वह अपनी बात खत्म करें। हालांकि, डॉ. निषाद अपनी बात कहते ही रहे। कुछ सपा सदस्य डॉ. निषाद की तरफ बढ़े और उनके हाथ से कागज छीना। मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे हाथपाई बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यही सपा का आचरण है। इतने पर भी जब विवाद थमता नहीं दिख रहा था तब विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना को आना पड़ा। उन्होंने आकर दोनों पक्षों को शांत करवाया और कहा कि जैसे सदन चलता रहा है वैसे ही चलने दिया जाए।

