रावलपिंडी: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बारे में 3 हफ्ते से परिवार और करीबियों को मिलने नहीं दिया गया है और न ही उनके बारे में कोई जानकारी मिल पा रही है। परिवार और समर्थकों को आशंका है कि आर्मी चीफ असीम मुनीर ने उनके साथ कोई जेल में ही कोई अनहोनी कर दी है। इसीलिए परिजनों को मिलने से रोका जा रहा है। 21 दिनों से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी इमरान के बारे में कोई खबर नहीं मिल पा रही है। ऐसे में इमरान के बिगड़ती हालत को लेकर पाकिस्तान में सियासी तूफान मच गया है।
सड़कों पर उतरे समर्थक
अडियाला जेल में बंद खान से तीन हफ्ते से कोई संपर्क नहीं हो सका है। उनकी बहनों को मिलने की इजाजत नहीं मिल रही, जिसके चलते सैकड़ों पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। अफगानिस्तान टाइम्स जैसे मीडिया आउटलेट्स ने खान की हत्या की अफवाहें फैलाईं, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इसे ‘फर्जी’ बताकर खारिज कर दिया। पीटीआई के मुताबिक, खान को अगस्त 2023 से कई भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में रखा गया है। पिछले तीन हफ्तों से उन्हें एकांत कारावास (सोलिटरी कन्फाइनमेंट) में डाल दिया गया, जहां परिवार, वकील या डॉक्टर से कोई मुलाकात नहीं हो रही। कोर्ट के आदेशों के बावजूद जेल प्रशासन परिवार को प्रवेश नहीं दे रहा।
खान की बहनें जेल के बाहर धरने पर
इमरान खान की बहनें अलीमा खान, नूरीन नियाज़ी और डॉ. उज़मा खान ने 25 नवंबर को जेल के बाहर 10 घंटे का धरना दिया। पुलिस ने उन्हें घसीटा, लाठियां भांजीं और हिरासत में ले लिया। अलीमा ने कहा, “यह अमानवीय है। हमारा जुर्म सिर्फ भाई से मिलना चाहना है।” एक बहन को चोटें आईं, जबकि महिला वकीलों को भी पीटा गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि रात 12:30 बजे पुलिस ने पानी की बौछारें कीं, लाइटें बंद कर दीं और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया।
पीटीआई ने जताई राजनीतिक साजिश की आशंका
इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेता गोहर अली खान ने इसे “राजनीतिक हत्या का प्रयास” बताया। सीनेटर अल्लामा राजा नसीर अब्बास ने चेतावनी दी, “धैर्य की परीक्षा न लें, वरना क्रांति हो जाएगी।” जेल अधीक्षक ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट को बताया कि खान का एक्स अकाउंट जेल से नहीं चलाया जा रहा, लेकिन अफवाहें थमने का नाम नहीं ले रही। 25-26 नवंबर की आधी रात को जेल के बाहर हजारों समर्थक इकट्ठा हो गए। “फ्री इमरान खान” और “असीम मुनीर हटाओ” के नारे लगे। जनरल ज़ेड (युवा) कार्यकर्ता शहरों में मार्च निकाल रहे हैं। सरकार ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, लेकिन बातचीत के बाद धरना समाप्त हुआ। खान की बहनों ने पंजाब पुलिस प्रमुख उस्मान अनवर को पत्र लिखकर “निष्पक्ष जांच” की मांग की, इसे “संगठित हिंसा” बताया।
असीम मुनीर पर आरोप
पीटीआई का आरोप है कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और शहबाज़ शरीफ सरकार खान को चुप कराना चाहती है, क्योंकि उनकी बयानबाजी आर्थिक संकट और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाती है। संयुक्त राष्ट्र के नेल्सन मंडेला नियमों का हवाला देते हुए पीटीआई ने इसे “यातना” करार दिया। खान ने पहले जेल से संदेश भेजा था, “स्वतंत्रता या मौत, कोई बीच का रास्ता नहीं।”यह घटना पाकिस्तान की सियासत को और गर्म कर रही है। आर्थिक मंदी, महंगाई और सैन्य हस्तक्षेप के बीच पीटीआई का जनाधार मजबूत हो रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खान को तुरंत परिवार से मिलने दिया गया, तो तनाव कम हो सकता है। फिलहाल, जेल के बाहर तनाव बरकरार है।

