भारत की धरती से पुतिन ने यूरोप को दी चेतावनी, कहा- यूक्रेन में सैनिक भेजना यानी रूस के साथ जंग

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भारत की धरती से पुतिन ने यूरोप को दी चेतावनी, कहा- यूक्रेन में सैनिक भेजना यानी रूस के साथ जंग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में यूरोपीय देशों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर वे यूक्रेन की जमीन पर सैनिक भेजते हैं, तो इसे रूस के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। पुतिन ने यह बयान शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।

‘हम यूरोप को धमकी नहीं दे रहे’

पुतिन ने कहा कि यूरोपीय देशों को रूस से किसी खतरे की आशंका नहीं पालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई खतरा न कभी था और न अब है, और रूस का यूरोपीय देशों को धमकाने का कोई इरादा नहीं है। रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, रूस के पास यूरोप के साथ किसी टकराव का कोई आधार नहीं है, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद तमाम मुद्दे सुलझा लिए गए थे और सोवियत संघ के विघटन के बाद बनी व्यवस्थाएं भी रूस की सहमति से ही लागू हुई थीं।

पुतिन ने आगे कहा कि इन व्यवस्थाओं के खिलाफ जाने वाला कोई भी कदम रूस के हितों के विपरीत होगा और अंतरराष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। इसी क्रम में उन्होंने यूरोपीय देशों की ओर से यूक्रेन में सैनिक भेजने पर चल रही चर्चा का सीधा जिक्र करते हुए इसे रूस के साथ सीधी जंग करार दिया।

यूरोप का रुख अलग

गौरतलब है कि यूरोपीय देश रूस के इस दावे से सहमत नहीं रहे हैं कि उससे कोई खतरा नहीं है। यूरोपीय पक्ष लगातार यह रुख जताता रहा है कि यूक्रेन पर रूस का हमला यूरोपीय संघ के लिए व्यापक खतरे की आशंका पैदा करता है, और इसी आधार पर कई यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को सैन्य व आर्थिक समर्थन दिया है। यह भी पहला मौका नहीं है जब पुतिन ने यूरोप को इस तरह की चेतावनी दी हो — इससे पहले भी वे सैन्य सहायता जारी रहने पर रूस की ओर से सख्त प्रतिक्रिया की बात कह चुके हैं।

अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिश

फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। इसी महीने की शुरुआत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने मॉस्को यात्रा के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की थी।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत में पुतिन

पुतिन 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में उनसे मुलाकात की, जो सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन से पहले हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जिसमें ‘प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030’ के क्रियान्वयन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग के मुद्दे शामिल थे। यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच दो हफ्ते से भी कम समय में दूसरी मुलाकात थी — इससे पहले वे 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के दौरान भी मिले थे।

पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देशों की यूक्रेन युद्ध में संभावित सैन्य भूमिका को लेकर चर्चा तेज है, और इससे आने वाले दिनों में यूरोप-रूस संबंधों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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