इटावा में बुखार का कहर: दो मासूमों की मौत, 8 बच्चे बीमार; एक ICU में भर्ती, गांव में झोलाछाप के भरोसे इलाज

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बुखार की दहशत: इटावा में वायरल से दो मासूमों की मौत और आठ बीमार, पीएचसी में नहीं डॉक्टर; झोलाछाप निशाने पर

इटावा: जिले के गढ़ाकासदा गांव में वायरल बुखार ने दहशत पैदा कर दी है। पिछले दो दिनों में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि करीब आठ बच्चे बीमार हैं। इनमें एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे शहर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

दो बच्चों की मौत की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम आनन-फानन में गांव पहुंची और पांच बीमार बच्चों के नमूने लिए। शुरुआती जांच में डेंगू, टायफाइड और मलेरिया की रिपोर्ट निगेटिव आई है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में निगरानी बढ़ा दी है।

तीन दिन से बीमार था 13 साल का सतेंद्र

गढ़ाकासदा निवासी महेंद्र दोहरे का 13 वर्षीय बेटा सतेंद्र तीन दिन से बीमार था। परिजनों के मुताबिक, गुरुवार रात अचानक उसे उल्टी और दस्त हुए। हालत बिगड़ने के कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।

इसी तरह मुकेश सिंह की 12 वर्षीय बेटी गुनगुन भी करीब तीन दिन से बीमार थी। शुक्रवार को उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे इलाज के लिए बाबरपुर, औरैया स्थित निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

वहीं अरविंद का आठ वर्षीय बेटा आशिक गंभीर रूप से बीमार है और उसे शहर के निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

ये बच्चे भी बीमार

गांव में कई अन्य बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुनाल, मीनाक्षी, प्रिंसी, शिवानी, काजल, आर्यन और डेढ़ वर्षीय राघव शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीमार बच्चों की जांच के लिए नमूने लिए हैं और गांव में दवाएं वितरित की गई हैं।

गांव में डॉक्टर नहीं, झोलाछाप के भरोसे इलाज

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर की तैनाती नहीं होने के कारण उन्हें इलाज के लिए झोलाछाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन दोनों बच्चों की मौत हुई, वे पहले से बीमार थे और उनके परिजनों ने समय रहते स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं दी। विभाग के मुताबिक, दोनों बच्चों का इलाज झोलाछाप से कराया जा रहा था।

गांव में लगाया गया स्वास्थ्य शिविर

सीएचसी राजपुर के अधीक्षक डॉ. महेश पाल ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच की गई और बीमार लोगों को दवाएं दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव की निगरानी कर रही है।

एसडीएम चकरनगर रोहित कुमार मौर्य ने भी दो बच्चों की बीमारी के बाद मौत की पुष्टि की है और बताया कि डॉक्टरों की टीम से गांव की निगरानी कराई जा रही है।

फिलहाल बच्चों की बीमारी की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच और निगरानी के बाद ही बीमारी के कारणों की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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