आगरा में 46 दिन के सत्याग्रह का असर, रिहायशी इलाके से शराब का ठेका शिफ्ट; सुंदरकांड पाठ कर महिलाओं ने मनाया जश्न

4 Min Read
#image_title

आगरा: शहर के आलोक नगर चौराहे पर शराब के ठेके को रिहायशी क्षेत्र से हटाने की मांग को लेकर महिलाओं और युवाओं का 46 दिनों से चल रहा सत्याग्रह आखिरकार सफल हुआ। जिला प्रशासन ने ठेके को पुराने स्थान से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। ठेका शिफ्ट होने के बाद मंगलवार शाम स्थानीय लोगों ने सुंदरकांड पाठ कर खुशी जताई और प्रसादी वितरित की।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद रेनू गुप्ता का भी अभिनंदन किया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे महिलाओं और युवाओं के लंबे संघर्ष की जीत बताया।

46 दिन तक चला महिलाओं और युवाओं का सत्याग्रह

आलोक नगर चौराहे पर शराब के ठेके के खिलाफ स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने लगातार 46 दिनों तक सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग ठेका बंद कराने की नहीं, बल्कि उसे रिहायशी इलाके से दूसरी जगह स्थानांतरित कराने की थी।

स्थानीय लोगों का कहना था कि चौराहे के आसपास कई धार्मिक स्थल, स्कूल और कोचिंग सेंटर हैं। ऐसे में शराब के ठेके की मौजूदगी से खासकर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी।

ठेका शिफ्ट हुआ तो सुंदरकांड पाठ कर मनाया जश्न

ठेका स्थानांतरित होने के बाद मंगलवार शाम करीब 5 बजे स्थानीय निवासियों ने सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। पाठ के बाद लोगों में प्रसादी वितरित की गई। इस दौरान आंदोलन में सहयोग करने वालों और क्षेत्रीय पार्षद रेनू गुप्ता का अभिनंदन किया गया।

सत्याग्रह की सफलता पर हरिशंकर पाराशर और काके यादव ने महिलाओं और युवाओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाए गए आंदोलन के बाद प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मांग को स्वीकार किया है।

‘ठेका बंद कराना नहीं, रिहायशी इलाके से हटाना था लक्ष्य’

क्षेत्रीय पार्षद रेनू गुप्ता ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शराब का ठेका बंद कराना नहीं था। उनकी मांग थी कि ठेके को रिहायशी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाए।

उन्होंने कहा कि इससे एक तरफ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता दूर होगी, वहीं दूसरी ओर सरकार के राजस्व पर भी असर नहीं पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने इसी मांग को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी थी।

पांच मंदिर, स्कूल और कोचिंग सेंटर का दिया हवाला

स्थानीय निवासियों के अनुसार, आलोक नगर चौराहे के आसपास पांच मंदिर, स्कूल और कोचिंग सेंटर स्थित हैं। यहां बड़ी संख्या में महिलाओं, छात्राओं और विद्यार्थियों की आवाजाही रहती है। इसी वजह से शराब के ठेके को रिहायशी क्षेत्र से हटाने की मांग की जा रही थी।

स्थानीय लोगों की मांग और आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से ठेके को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया में जिलाधिकारी मनीष बंसल और जिला आबकारी अधिकारी कृष्ण पाल यादव के सहयोग का भी स्थानीय लोगों ने उल्लेख किया।

आंदोलन के बाद अब स्थानीय लोगों को राहत की उम्मीद

46 दिनों तक चले सत्याग्रह के बाद ठेका स्थानांतरित होने से स्थानीय निवासियों ने राहत की उम्मीद जताई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात जैसी अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

कार्यक्रम में सुरभि मित्तल, सुमन फौजदार, वर्षा रजौरिया, मोना सोलंकी, विवेक पाराशर, वंदना सिंघल, राहुल मित्तल समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।

Share This Article
Exit mobile version