आगरा: पिनाहट के चंबल घाट पर अवैध खनन और नदी क्षेत्र की गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बुधवार को चंबल घाट का औचक निरीक्षण किया और तहसील प्रशासन तथा वन विभाग के अधिकारियों से अवैध खनन की स्थिति की जानकारी ली। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन कराया जाए और चंबल नदी क्षेत्र में किसी भी स्थिति में अवैध खनन न होने दिया जाए।
चंबल नदी का यह इलाका राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य से जुड़ा होने के कारण पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट ने भी चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन से वन्यजीवों और अभयारण्य को होने वाले नुकसान को गंभीरता से लिया है। अप्रैल 2026 में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने तथा निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए थे।
चंबल घाट पर अवैध खनन को लेकर सख्ती
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चंबल नदी के यूपी सीमा वाले घाटों पर खनन प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए। अवैध गतिविधियों की निगरानी के लिए वन विभाग, खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग की जा रही है। इसके अलावा वन विभाग की ओर से निगरानी के लिए विशेष कैमरे भी लगाए गए हैं।
डीएम ने अधिकारियों को नियमित रूप से औचक निरीक्षण जारी रखने को कहा, ताकि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन या उससे जुड़ी गतिविधियां दोबारा पैर न पसार सकें।
वन और राजस्व भूमि की होगी पैमाइश
स्थलीय निरीक्षण के दौरान डीएम मनीष बंसल ने अधिकारियों को वन एवं राजस्व भूमि का सीमांकन कराने के निर्देश भी दिए। इसका उद्देश्य नदी क्षेत्र में भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के साथ अवैध गतिविधियों की निगरानी को और प्रभावी बनाना है।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम विनोद कुमार, तहसीलदार संपूर्ण कुलश्रेष्ठ, डीएफओ राजेश कुमार, रेंजर बाह कुलदीप सहाय पंकज और एसीपी बाह जितेंद्र कुमार समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
मोटरबोट सेवा बंद होने का मुद्दा भी उठा
निरीक्षण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने पिनाहट-कैंजरा घाट के बीच मोटरबोट सेवा बंद होने का मुद्दा भी जिलाधिकारी के सामने रखा। ग्रामीणों के अनुसार, सेवा बंद होने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती करीब 150 गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि मोटरबोट संचालन की अनुमति मिलने के बावजूद सेवा अभी नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकी है। इस संबंध में डीएम ने कहा कि वह मध्य प्रदेश प्रशासन से बातचीत कर समस्या का जल्द समाधान कराने का प्रयास करेंगे। इससे पहले भी मोटरबोट सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद ही नियमित संचालन शुरू होना था।
64 यात्रियों वाली मोटरबोट बहने से मचा था हड़कंप
मोटरबोट संचालन का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में यात्रियों से भरी एक मोटरबोट के बहने की घटना सामने आई थी। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के नगरा घाट से बाह के कैंजरा घाट की ओर जा रही मोटरबोट का इंजन बंद होने के बाद वह नदी के बहाव में बह गई थी।
इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोटरबोट सेवा पर रोक लगा दी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेवा बंद रहने से उन्हें दूसरे रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कारण चंबल पर निगरानी बढ़ी
चंबल नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही चिंता जता चुका है। अप्रैल में कोर्ट ने तीन राज्यों को अवैध खनन रोकने के लिए संयुक्त और प्रभावी व्यवस्था बनाने तथा संवेदनशील मार्गों पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाने जैसे कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आगरा प्रशासन ने भी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है।
ऐसे में डीएम का औचक निरीक्षण प्रशासन की इसी सख्त निगरानी व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। अब अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चंबल के संवेदनशील नदी क्षेत्र में प्रतिबंधित खनन गतिविधियां न हों और पर्यावरणीय नियमों का प्रभावी तरीके से पालन कराया जाए।

