अलीगढ़। पिता के निधन के बाद अक्सर परिवार में बेटे के कंधे की बात होती है, लेकिन अलीगढ़ में एक बेटी ने इस सोच को पीछे छोड़ते हुए अपने पिता की अंतिम यात्रा में बेटे का फर्ज निभाया। सासनी गेट क्षेत्र के ब्राह्मनपुरी में 19 वर्षीय निमि गुप्ता ने अपने पिता की अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
निमि के इस कदम ने न सिर्फ परिवार को भावुक कर दिया, बल्कि आसपास के लोगों के बीच भी उनकी हिम्मत और जज्बे की चर्चा होने लगी।
15 साल पहले हादसे में खो दिया था एक हाथ
ब्राह्मनपुरी निवासी निमिष गुप्ता हार्डवेयर कारोबारी थे। करीब 15 साल पहले एक सड़क हादसे में उन्होंने अपना एक हाथ गंवा दिया था। जिंदगी ने उन्हें बड़ी चुनौती दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
एक हाथ से ही गाड़ी चलाना सीखा और अपने कारोबार को आगे बढ़ाते रहे। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों निमि और कनिष्का की पढ़ाई में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। दोनों बेटियां दिल्ली में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं।
परिवार में उनकी पत्नी श्वेता भी हैं।
कारखाने में काम करते वक्त बिगड़ी तबीयत
करीब छह दिन पहले निमिष अपने कारखाने में मौजूद थे। उस समय स्टाफ भी नहीं आया था। उन्होंने एक हाथ से हार्डवेयर की भारी पेटी उठाकर दूसरी जगह रखने की कोशिश की।
इसी दौरान शरीर में खिंचाव आया और उनकी रीढ़ की हड्डी से खून निकलने लगा। इसके बाद उन्हें पैरालिसिस जैसे लक्षण दिखाई देने लगे।
परिजन आनन-फानन में उन्हें रामघाट रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई। कई दिनों तक इलाज चलने के बाद सोमवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया।
दिल्ली से खबर मिलते ही घर पहुंची बेटी
पिता की मौत की खबर मिलते ही दिल्ली में पढ़ाई कर रही 19 वर्षीय बड़ी बेटी निमि तुरंत अलीगढ़ पहुंचीं।
मंगलवार को जब पिता की अंतिम यात्रा की तैयारी हुई तो लोगों की नजरें इस बात पर थीं कि अर्थी को कंधा कौन देगा। इसी दौरान निमि आगे आईं और अपने पिता की अर्थी को खुद कंधा दिया।
बेटी को इस तरह पिता को अंतिम विदाई देते देखकर परिवार, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग भावुक हो उठे।
‘बेटी हो तो निमि जैसी…’
निमि के इस साहस ने अंतिम यात्रा में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। लोगों ने कहा कि पिता ने जिन बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए पूरी जिंदगी मेहनत की, उसी बेटी ने अंतिम समय में उनके लिए वह फर्ज निभाया जिसे समाज लंबे समय से बेटों से जोड़कर देखता आया है।
निमि ने साबित कर दिया कि बेटी सिर्फ घर की जिम्मेदारी नहीं संभालती, जरूरत पड़ने पर वह बेटे से बढ़कर भी फर्ज निभा सकती है।
पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह भावुक दृश्य अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
