नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिला। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में आरोप लगाया कि हल्द्वानी में उनके भाषण के बाद उस मंच को शुद्ध करने के लिए हवन कराया गया।
खरगे ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में विपक्ष के नेता के भाषण के बाद इस तरह किसी मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना उचित है। उनके आरोपों पर राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब दिया और कहा कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया।
खरगे ने सदन में क्या कहा?
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद खरगे ने हल्द्वानी में अपने भाषण के बाद हुए कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि वह हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित करने गए थे, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। खरगे के मुताबिक, उन्होंने अपने भाषण में किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, बल्कि सरकार से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
खरगे ने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद बीजेपी से जुड़े लोगों ने मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहां हवन कराया।
उन्होंने सदन में सवाल उठाया कि अगर विपक्ष के नेता के भाषण के बाद मंच को शुद्ध करने जैसी कार्रवाई की जाती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भावना के अनुरूप कैसे हो सकती है।
नड्डा ने दिया जवाब, बोले- ‘हम जांच कराएंगे’
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो यह बेहद दुखद है। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
नड्डा ने कहा कि पार्टी इस तरह के किसी भी कृत्य का समर्थन नहीं करती और वह मामले की जांच कराएंगे। उन्होंने खरगे को भरोसा दिलाते हुए कहा कि हल्द्वानी में वास्तव में क्या हुआ, इसकी निश्चित रूप से जांच की जाएगी।
नड्डा ने यह भी कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को देखेंगे और खरगे की भावनाएं आहत हुई हैं तो यह सभी के लिए खेद का विषय है।
प्रियंका गांधी ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह का आयोजन एक खास तरह की वैचारिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले की निंदा करने और माफी मांगने की मांग की।
प्रियंका गांधी ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर विपक्ष सवाल उठाता रहा है।
8 अगस्त को हल्द्वानी पहुंचे थे खरगे
यह पूरा विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद शुरू हुआ।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस रैली को संबोधित किया था। रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ कराए जाने की बात सामने आई।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, श्रीराम सेना की ओर से यह आयोजन कराया गया था। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कांग्रेस ने बताया दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता
कांग्रेस नेताओं ने कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ करना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है।
कांग्रेस ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और इसे सामाजिक सम्मान तथा समानता के मुद्दे से जोड़कर देखा है।
क्या था खरगे का हल्द्वानी भाषण?
खरगे की हल्द्वानी रैली में कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया था। कांग्रेस के मुताबिक, रैली का उद्देश्य राज्य में पार्टी के राजनीतिक अभियान को मजबूत करना और सरकार के खिलाफ अपने मुद्दों को जनता के बीच रखना था।
खरगे ने राज्यसभा में दावा किया कि उनके भाषण में किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। इसके बावजूद मंच के कथित शुद्धिकरण को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
संसद तक पहुंचा हल्द्वानी का विवाद
जो विवाद पहले हल्द्वानी तक सीमित था, वह अब देश की संसद तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इसे खुद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने सदन में उठाया।
खरगे के आरोपों के बाद नड्डा का जांच का भरोसा देना इस मामले को और महत्वपूर्ण बना देता है। अब निगाह इस बात पर होगी कि बीजेपी की ओर से की जाने वाली जांच में क्या सामने आता है और हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
फिलहाल कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और सम्मान का मुद्दा बता रही है, जबकि बीजेपी ने घटना से खुद को अलग करते हुए इसकी जांच कराने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
