नई दिल्ली: वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के फैसले पर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने 1937 में “तुष्टिकरण” की राजनीति के तहत वंदे मातरम के दो हिस्से किए थे, जिसका असर आगे चलकर देश के विभाजन की राजनीति पर पड़ा।
शाह ने कहा कि भारत पहले ही वंदे मातरम को लेकर हुई उस ऐतिहासिक घटना के परिणाम देख चुका है और अब देश ऐसी गलती दोबारा नहीं होने देगा।
कांग्रेस के दो छंद गाने के फैसले पर भड़के शाह
अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो छंदों को ही गाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव को दोहरा रही है और इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी का यह फैसला तुष्टिकरण की नीति को दर्शाता है।
शाह ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा प्रतीक है। उनके मुताबिक, इस गीत के नारे के साथ हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया और बलिदान दिया।
‘कांग्रेस ने शहीदों का अपमान किया’
गृह मंत्री ने कांग्रेस के फैसले को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जोड़ते हुए कहा कि वंदे मातरम की मूल रचना का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसके पूर्ण स्वरूप को सरकारी कार्यक्रमों में गाने का निर्णय लिया है। शाह का आरोप है कि कांग्रेस इस फैसले का विरोध करके न सिर्फ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का बल्कि उन स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान कर रही है, जिन्होंने आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम को प्रेरणा के रूप में इस्तेमाल किया।
‘1937 की गलती के गंभीर परिणाम भुगते’
अमित शाह ने अपने बयान में 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव को देश के विभाजन से जोड़ते हुए कहा कि उस समय वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को लेकर कांग्रेस ने जो फैसला किया, उसने “दो राष्ट्र के सिद्धांत” को मजबूती देने और अंततः देश के विभाजन की परिस्थितियां बनाने में भूमिका निभाई।
हालांकि, 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव और 1947 के भारत विभाजन के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध बताना ऐतिहासिक रूप से एक राजनीतिक व्याख्या है, जिसे लेकर इतिहासकारों के बीच व्यापक संदर्भ मौजूद है। विभाजन के पीछे कई दशकों में विकसित हुए राजनीतिक, सांप्रदायिक और औपनिवेशिक कारकों की भूमिका रही थी।
‘कांग्रेस संसद के फैसले को नकार रही’
शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ अपने 1937 के प्रस्ताव का पालन कर रही है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार के मौजूदा निर्णय का विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। शाह ने देश की जनता से कांग्रेस के फैसले का विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि अब देश में “तुष्टिकरण की राजनीति” नहीं चलनी चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस कार्यालय में भी हुआ था विवाद
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पहले भी चर्चा में रही थी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस कार्यालय में पूरा वंदे मातरम बजाए जाने के दौरान सोनिया गांधी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कुछ कहती हुई दिखाई दी थीं। बाद में कांग्रेस नेताओं ने सफाई दी थी कि वह पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगाने की बात कर रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे।
इसके कुछ दिन बाद कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो छंद गाने का फैसला घोषित किया। इसी फैसले ने अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
