लाल किले के पास 2025 के धमाके के पीछे AQIS! UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, NIA जांच से भी जुड़ती हैं कड़ियां
नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए भीषण कार बम धमाके को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की Analytical Support and Sanctions Monitoring Team की 38वीं रिपोर्ट में पहली बार इस हमले को सीधे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़े जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक AQIS ने इस हमले को अंजाम दिया था।
इस खुलासे की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पहले ही इस मामले में 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। NIA के मुताबिक लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए वाहन विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। जांच में आरोपियों को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जोड़ा गया, जिसे AQIS का एक ऑफशूट बताया गया है।
UN की रिपोर्ट में पहली बार सीधे AQIS का नाम
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 से 9 जून 2026 तक की गतिविधियों के आकलन पर आधारित है और इसे अगस्त 2026 में सुरक्षा परिषद के समक्ष रखा गया।
इसमें AQIS को लेकर कई महत्वपूर्ण आकलन किए गए हैं। सबसे बड़ा बिंदु दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले से उसका कथित संबंध है। इससे इस मामले को लेकर भारत की जांच को एक अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला है।
हालांकि, भारत में NIA की जांच और अदालत में दाखिल चार्जशीट के तथ्यों को देखते हुए यह भी महत्वपूर्ण है कि UN रिपोर्ट का निष्कर्ष और भारतीय जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए कानूनी साक्ष्य अलग-अलग प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं। अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।
NIA की चार्जशीट में क्या सामने आया था?
NIA ने मई 2026 में इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी के मुताबिक सभी आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे और यह संगठन AQIS का ऑफशूट है।
NIA ने अपनी जांच में कथित साजिश को ‘Operation Heavenly Hind’ नाम से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने प्रतिबंधित हथियारों और विस्फोटक सामग्री से जुड़े इंतजाम किए थे तथा साजिश को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तर पर नेटवर्क तैयार किया था।
NIA की चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा भौतिक साक्ष्य शामिल किए गए हैं।
AQIS अब पहले से ज्यादा बिखरे लेकिन सक्रिय नेटवर्क में बदल रहा?
UN रिपोर्ट के मुताबिक AQIS का स्वरूप समय के साथ बदल रहा है। संगठन अब बड़े और आसानी से पहचाने जाने वाले समूहों के बजाय छोटी-छोटी इकाइयों और बिखरे हुए नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी आकलन किया गया है कि संगठन ने अपने लॉजिस्टिक और वित्तीय नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश की है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे छोटे सेल को ट्रैक करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
UN की रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों को दक्षिण एशिया में व्यापक सुरक्षा चुनौती के संदर्भ में भी देखा गया है।
बांग्लादेश में नेटवर्क फैलाने की आशंका
रिपोर्ट में AQIS की ओर से बांग्लादेश में संभावित रूप से ऑपरेशनल सेल स्थापित करने की कोशिशों को लेकर भी चिंता जताई गई है। अगर यह नेटवर्क वहां मजबूत होता है तो दक्षिण एशिया में संगठन की गतिविधियों का भौगोलिक दायरा बढ़ सकता है।
यह आकलन भारत समेत पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण एशिया में पहले से कई आतंकवादी संगठनों और उनके छोटे नेटवर्क की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव से भी जुड़ा बड़ा संदर्भ
UN रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार सीमा पार हमलों और पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया है।
रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों और पाकिस्तान में सक्रिय कुछ अन्य आतंकवादी नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर भी सुरक्षा चिंताओं का उल्लेख किया गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि AQIS को केवल एक देश तक सीमित संगठन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि दक्षिण एशिया में सक्रिय कई आतंकवादी नेटवर्क के व्यापक परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है।
आतंकियों के लिए AI बन रहा नया हथियार?
UN की रिपोर्ट का एक और अहम पहलू आतंकवादी संगठनों द्वारा Artificial Intelligence के संभावित इस्तेमाल से जुड़ा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आतंकवादी और चरमपंथी समूह तकनीकी साधनों का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों और प्रचार क्षमता को बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। इसमें AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल जानकारी जुटाने और प्रचार सामग्री तैयार करने जैसे कामों में किए जाने की चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में ISIL-K की ओर से अलग-अलग भाषाओं में प्रचार सामग्री तैयार करने के लिए AI जैसी तकनीक के इस्तेमाल का भी उल्लेख है।
यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि AI तकनीक आतंकवादी संगठनों को कम समय में ज्यादा लोगों तक अपना प्रचार पहुंचाने और अलग-अलग भाषाओं में सामग्री तैयार करने की क्षमता दे सकती है।
रासायनिक और जैविक हथियारों को लेकर भी चिंता
रिपोर्ट में ISIL से जुड़े प्रचार साहित्य में जहरीले रसायनों और जैविक एजेंटों से संबंधित सामग्री के सामने आने का उल्लेख भी किया गया है।
ऐसी सामग्री का प्रसार यह संकेत देता है कि कुछ आतंकवादी संगठन अब भी रासायनिक और जैविक हथियारों से जुड़ी क्षमताओं और जानकारी हासिल करने में रुचि रखते हैं।
यह पहलू इसलिए संवेदनशील है क्योंकि आतंकवादी संगठनों की तकनीकी क्षमता बढ़ने के साथ सुरक्षा एजेंसियों के सामने पारंपरिक हथियारों के अलावा नए प्रकार के खतरों से निपटने की चुनौती भी बढ़ रही है।
UN की आतंकी प्रतिबंध सूची में भी बदलाव
रिपोर्ट की अवधि के दौरान संयुक्त राष्ट्र की आतंकी प्रतिबंध सूची में भी बदलाव किए गए। तीन नए नाम सूची में जोड़े गए, जबकि सात नाम हटाए गए।
रिपोर्ट में अल-नुसरा फ्रंट/हयात तहरीर अल-शाम (HTS) से जुड़े प्रतिबंधों में बदलाव का भी उल्लेख है। ऐसे बदलाव संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद विरोधी व्यवस्था में समय-समय पर होने वाली समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पहले JeM का नाम भी आया था
लाल किले के धमाके को लेकर संयुक्त राष्ट्र की इससे पहले की रिपोर्ट में एक सदस्य देश की ओर से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के कथित लिंक का भी उल्लेख किया गया था। फरवरी 2026 में सामने आई 37वीं रिपोर्ट में कहा गया था कि एक सदस्य देश ने JeM को कई हमलों से जोड़ते हुए लाल किले पर हुए हमले से भी उसके संबंध की सूचना दी थी।
अब 38वीं रिपोर्ट में AQIS को लेकर सामने आया नया आकलन इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच और आतंकवादी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर एक और महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ता है।
लाल किले का धमाका अब और बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा?
लाल किले के पास हुआ नवंबर 2025 का धमाका पहले ही भारत की सबसे गंभीर आतंकी जांचों में शामिल हो चुका है। NIA की चार्जशीट में AQIS से जुड़े संगठन का लिंक सामने आने के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम की रिपोर्ट ने भी AQIS को हमले से जोड़ दिया है।
फिर भी मामले का अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया में तय होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि NIA की जांच और UN की ताजा रिपोर्ट के बीच AQIS कनेक्शन की एक महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है, जिससे दिल्ली धमाके की साजिश और उसके संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।
