आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में 10 तेंदुओं की खाल और उनके अंगों की बरामदगी से शुरू हुई जांच अब एक बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क तक पहुंचती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने मामले में कथित मुख्य आरोपी वसीम अकरम को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया है। वह उत्तम नगर का रहने वाला बताया जा रहा है और एक वन्यजीव संरक्षण संस्था से जुड़ा होने की जानकारी सामने आई है।
इस गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या नौ हो गई है। जांच में दिल्ली पुलिस के एक बर्खास्त सिपाही का नाम भी सामने आया है, जिस पर अंतरराज्यीय शिकार और वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है।
आगरा में 10 तेंदुओं की खाल मिलने से खुला मामला
मामले की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को हुई, जब आगरा के सैंया क्षेत्र में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार संदिग्धों को पकड़ा गया था। उनके पास से 10 तेंदुओं की खाल और सिर बरामद किए गए थे।
जांच में सामने आया कि तेंदुओं की खाल मध्य प्रदेश से लाई गई थी और इन्हें दिल्ली, हरियाणा तथा उत्तर भारत के दूसरे इलाकों में बेचने की तैयारी थी।
वन्यजीव विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तस्करी के पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।
दिल्ली से पकड़ा गया कथित मास्टरमाइंड
जांच आगे बढ़ने के बाद एजेंसियों ने कथित मुख्य आरोपी वसीम अकरम तक पहुंच बनाई। उसे नई दिल्ली के उत्तम नगर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि वसीम की भूमिका सिर्फ तस्करी के नेटवर्क में थी या वह शिकार से लेकर खाल को अंतिम खरीदार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को संचालित कर रहा था।
इसके अलावा एजेंसियां कथित तस्करी नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक भी खंगाल रही हैं।
बर्खास्त सिपाही पर भी शक
इस केस में एक और चौंकाने वाला नाम सामने आया है। जांच एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस के बर्खास्त सिपाही भगवान सिंह उर्फ सलीम को भी गिरफ्तार किया है।
वह दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बिजवासन इलाके का रहने वाला बताया गया है। उस पर अंतरराज्यीय शिकार और वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है।
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि पुलिस विभाग में रह चुका व्यक्ति कथित तौर पर इस नेटवर्क में किस भूमिका में था और उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे।
मध्य प्रदेश के जंगलों तक पहुंची जांच
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को कथित तौर पर तेंदुओं के शिकार के संभावित ठिकानों की जानकारी मिली है।
आपके दिए विवरण के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि छह तेंदुओं का शिकार कूनो वन्यजीव वनमंडल, दो का श्योपुर वनमंडल और दो का मुरैना के चंबल अभयारण्य क्षेत्र में किया गया था। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया से होनी बाकी है।
कूनो क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह चीता संरक्षण से जुड़े व्यापक लैंडस्केप का हिस्सा है।
खालों को कहां बेचने की थी तैयारी?
आगरा में शुरुआती गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में तस्करों ने कथित तौर पर बताया था कि खाल मध्य प्रदेश से लाई जाती थीं और दिल्ली, हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में बेची जाती थीं।
जांच एजेंसियों का फोकस अब उन बिचौलियों, खरीदारों और फाइनेंसरों तक पहुंचने पर है, जो इस अवैध कारोबार के अगले चरण से जुड़े हो सकते हैं।
आगरा की भौगोलिक स्थिति भी इस नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण बताई गई है। आगरा के जरिए हाईवे और अन्य परिवहन मार्ग उत्तर भारत के कई हिस्सों से जुड़े हैं, इसलिए तस्करी के सामान को आगे ले जाना आसान हो सकता है।
खरीदार बनकर वन विभाग ने पकड़े थे तस्कर
23 जुलाई की कार्रवाई भी काफी दिलचस्प तरीके से की गई थी। वन विभाग की टीम ने कथित तस्करों से संपर्क कर खरीदार बनकर 10 खाल खरीदने की बातचीत शुरू की थी। कई दिनों तक संपर्क में रहने के बाद आरोपियों को आगरा के सैंया क्षेत्र में बुलाया गया, जहां टीम ने उन्हें दबोच लिया।
इस कार्रवाई में वन विभाग के साथ पुलिस और Wildlife SOS की भूमिका भी रही।
तेंदुआ शिकार और तस्करी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
भारतीय तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अत्यधिक संरक्षित प्रजाति है। तेंदुए का शिकार करना, उसकी खाल या शरीर के अंगों का अवैध कब्जा और कारोबार गंभीर अपराध है।
इसी वजह से जांच एजेंसियां सिर्फ खाल बरामद होने तक मामला सीमित नहीं रखना चाहतीं, बल्कि यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन तेंदुओं का शिकार किसने किया, खाल किसने खरीदी, किसने परिवहन कराया और अंतिम खरीदार कौन थे।
अब 9 आरोपी, लेकिन नेटवर्क कितना बड़ा?
आगरा से शुरू हुई कार्रवाई अब दिल्ली और मध्य प्रदेश तक पहुंच चुकी है। नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद जांच एजेंसियों को शक है कि नेटवर्क इससे कहीं बड़ा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वसीम अकरम की गिरफ्तारी के बाद वन्यजीव तस्करी के इस पूरे सिंडिकेट के असली खिलाड़ी और अंतिम खरीदार भी सामने आएंगे?
फिलहाल एजेंसियां पूछताछ और आगे की जांच के जरिए इस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं।
