बरेली मंडल में यूरिया खाद की बढ़ती मांग को लेकर मंडलायुक्त ने इसके औद्योगिक कार्य में प्रयोग होने का संदेह जताया है। उन्होंने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कृषि अधिकारियों से खाद की समस्या पर पूछताछ की। वहीं, सीएमओ को स्वास्थ्य केंद्रों पर संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। संस्थागत प्रसव की संख्या कम होने पर मंडलायुक्त ने नाराजगी भी जाहिर की है।
मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी सोमवार को चारों जिले के अधिकारियों के साथ विकास भवन सभागार में मंडलीय समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कृषि अधिकारियों से बिना सब्सिडी प्रति बोरी यूरिया खाद का मूल्य पूछा तो बताया गया कि किसानों को एक बोरी यूरिया खाद पर 1185.26 रुपये की छूट (सब्सिडी) मिल रही है। वैसे प्रति बोरी यूरिया का मूल्य 1451.76 रुपये है, पर सब्सिडी का लाभ देकर किसानों को सिर्फ 266.50 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। चूंकि, औद्योगिक क्षेत्र में प्रयोग होने वाली यूरिया महंगी होती है और उसमें कोई सब्सिडी का लाभ भी नहीं है, हालांकि नाईट्रोज उसमें भी 46 प्रतिशत होती है। ऐसे में संदेह होने पर मंडलायुक्त ने चारों जिलों के डीएम और संयुक्त निदेशक कृषि को निर्देश दिए हैं कि यूरिया खाद की खपत की जांच कर ली जाए। संयुक्त निदेशक कृषि ने मंडलायुक्त को मंडल में यूरिया खाद का अभाव न होने की बात बताई।
इसी क्रम में मंडलायुक्त ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की। डॉक्टरों की उपलब्धता और टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के बारे में सीएमओ से पूछताछ की। संस्थागत प्रसव की समीक्षा में पाया कि ग्राम अमरिया, जरियनपुर और बरखेड़ा में प्रसव कम हो पा रहे हैं। जरियनपुर एवं पूरनपुर में सिजेरियन भी नहीं हो पा रहे हैं। सीएमओ से कारण पूछने के बाद उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर 10 से अधिक प्रसव कराएं। चिकित्सा इकाईयों में अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा संबंधी आदेशों का अनुपालन हो। बरेली सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने मंडलायुक्त को बताया कि 16 स्वास्थ्य केंद्रों में से 14 में फायर एनओसी मिल गई है। बिथरी चैनपुर और फतेहगंज पश्चिमी के स्वास्थ्य केंद्र के लिए अभी एनओसी नहीं मिल पाई है। नियमित टीकाकरण में मंडल का प्रतिशत 96.4 पाया गया, जबकि आयुष्मान कार्ड बनाने में बदायूं पीछे पाया गया।

