जम्मू कश्मीर की सेंट्रल जेल से पुलिस ने डिजिटल डिवाइस जब्त की है। पुलिस को जेल के अंदर डिजिटल सिग्नेचर होने के पुख्ता सबूत मिले थे। इसके बाद जेल परिसर में तलाशी ली गई और डिजिटल डिवाइस बरामद की गई। जम्मू कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर ने सेंट्रल जेल श्रीनगर में आतंक से जुड़े एक मामले में तलाशी ली, जिसमें डिजिटल डिवाइस मिले। यह तलाशी एनआईए एक्ट के तहत ली गई। श्रीनगर के स्पेशल जज ने तलाशी का वारंट जारी किया था।
इस मामले में साल 2023 में यूएपी एक्ट की धारा 13 और 39 के तहत पुलिस स्टेशन सीआई कश्मीर में एफआईआर दर्ज हुई थी। सेंट्रल जेल परिसर में संदिग्ध डिजिटल सिग्नेचर होने के भरोसेमंद टेक्निकल सुरागों पर कार्रवाई करते हुए, जेल अधिकारियों के साथ मिलकर कई ब्लॉक और बैरकों में तलाशी अभियान चलाया गया।
बड़े टेरर नेटवर्क का हो सकता है खुलासा इस अभियान के दौरान, जांच से जुड़े डिजिटल कम्युनिकेशन डिवाइस के रूप में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई और उसे जब्त कर लिया गया। इन डिवाइस की डिटेल्ड फोरेंसिक जांच की जाएगी ताकि संभावित लिंक का पता लगाया जा सके और एक बड़े टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। इसके साथ ही, जांच एजेंसी उस साफ सिक्योरिटी ब्रीच की जांच कर रही है जिससे ऐसे डिवाइस हाई-सिक्योरिटी जेल में घुसे। इस काम में शामिल मददगारों और सहयोगियों की भूमिका की पूरी तरह से जांच की जाएगी और सही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान के लिए अभियान यह ऑपरेशन जरूरी सबूतों को सामने लाने, गैर-कानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने और जेलों सहित सेंसिटिव सिक्योरिटी जोन के अंदर कम्युनिकेशन डिवाइस के गलत इस्तेमाल को रोकने की लगातार कोशिश का हिस्सा है। इसका मकसद केंद्र शासित प्रदेश में टेरर इकोसिस्टम को खत्म करना भी है, इसके लिए टेररिस्ट साथियों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान करके उन पर देश के कानून के मुताबिक मुकदमा चलाया जाएगा, जो ऐसे तरीकों से गैर-कानूनी गतिविधियों में मदद करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।

