अलीगढ़ में हुए दर्दनाक सड़क हादसे की कहानी जितनी भयावह है, उतनी ही दिल दहला देने वाली भी। सब इंस्पेक्टर श्रवण कुमार तोमर ने हादसे से कुछ ही देर पहले तय किया था कि रास्ते में किसी होटल पर खाना खा लेंगे। उन्हें सब्जी खरीदने के लिए रुकना भी नहीं था। लेकिन सड़क किनारे रखी ताजी हरी सब्जियों ने उनका इरादा बदल दिया और कुछ मिनट का यही ठहराव उनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन गया।
होटल में खाना खाने का था प्लान, सब्जियां देखकर रुक गए
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रवण कुमार मडराक थाने से अलीगढ़ की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने साथियों से कहा था कि किसी होटल में रुककर खाना खा लेंगे। वीरपाल की सब्जी की दुकान पर रुकने का उनका कोई इरादा नहीं था।
लेकिन रास्ते से गुजरते वक्त उनकी नजर दुकान पर रखी ताजी हरी सब्जियों पर पड़ी। अचानक उन्होंने बाइक रोक दी और सब्जी खरीदने के लिए दुकान पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने कुछ सब्जियों के दाम पूछे और मोलभाव करने के बाद कीमत ज्यादा बताते हुए वापस बाइक की ओर जाने लगे।
तभी सब्जी विक्रेता वीरपाल ने उनसे कहा कि जो पसंद हो ले जाइए और जितने पैसे ठीक लगें, दे दीजिए। यह सुनकर दरोगा दोबारा दुकान की ओर लौटे और सब्जी छांटने लगे। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने वहां ऐसी टक्कर मारी कि तीन लोगों की जान चली गई।
चंद मिनट का ठहराव बना जिंदगी का आखिरी सफर
अगर श्रवण कुमार सब्जियों को देखकर बाइक नहीं रोकते या वीरपाल की बात सुनकर दोबारा दुकान पर नहीं लौटते, तो शायद घटनाक्रम कुछ और होता। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कुछ मिनट के इस ठहराव ने उन्हें उस जगह पहुंचा दिया, जहां ट्रक की भीषण टक्कर ने उनकी जान ले ली।
इस हादसे में सब इंस्पेक्टर श्रवण कुमार तोमर के अलावा सब्जी विक्रेता वीरपाल और उनकी पत्नी रामकली देवी की भी मौत हो गई।
1992 बैच के पुलिसकर्मी थे श्रवण कुमार
सब इंस्पेक्टर श्रवण कुमार तोमर 1992 बैच के पुलिसकर्मी थे। सोमवार रात पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा गया। शव देखते ही उनके बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
इसके बाद पुलिस लाइन में उन्हें विभागीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। एसएसपी नीरज कुमार जादौन समेत पुलिस अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी दी। इस दौरान एसएसपी ने खुद दरोगा की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम संस्कार के लिए परिजन उनका पार्थिव शरीर लेकर पैतृक जिले बागपत रवाना हो गए।
पोस्टमार्टम में सामने आई हादसे की भयावह तस्वीर
हादसा इतना भीषण था कि श्रवण कुमार, वीरपाल और रामकली देवी के शवों की हालत देखकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी हैरान रह गए। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक की टक्कर से तीनों के शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे।
पोस्टमार्टम के दौरान उनकी हड्डियां पूरी तरह चकनाचूर मिलीं, जबकि लीवर, फेफड़ों और अन्य आंतरिक अंगों को भी गंभीर क्षति पहुंची थी। शवों की स्थिति इतनी खराब थी कि चिकित्सकों के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करना भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
गांव में पसरा मातम, पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
सोमवार शाम वीरपाल और रामकली देवी के शव उनके गांव बढ़ौली फत्ते खां पहुंचे तो बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जुट गए। परिवार में चीख-पुकार मच गई। पुलिस की मौजूदगी में दोनों का अंतिम संस्कार कराया गया।
यह हादसा सिर्फ तीन परिवारों को गहरे दुख में छोड़ गया, बल्कि यह भी दिखाता है कि सड़क पर कभी-कभी महज कुछ मिनट का एक फैसला पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है।
