बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार में शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया के हिंदू राष्ट्र को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीदर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो “दमनकारी व्यवस्था” के लौटने का खतरा पैदा हो सकता है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
यतींद्र सिद्धारमैया ने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए कहा कि कुछ सांप्रदायिक ताकतें धर्म के माध्यम से दमनकारी व्यवस्था को वापस लाने का प्रयास कर रही हैं और ऐसे प्रयासों का लोकतांत्रिक एवं अहिंसक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए।
क्या कहा यतींद्र सिद्धारमैया ने?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, “अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है, तो दमनकारी व्यवस्था वापस आ जाएगी। सांप्रदायिक ताकतें धर्म का इस्तेमाल कर लोगों को दबाने की कोशिश कर रही हैं। हमें इसके खिलाफ अहिंसक तरीके से संघर्ष करना होगा।”
उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और सामाजिक न्याय व समानता के लिए काम करना चाहिए।
सामाजिक एकजुटता पर भी दिया जोर
यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि समाज की एकता से ही राजनीतिक भागीदारी मजबूत होगी और सभी वर्गों के विकास तथा कल्याण का रास्ता खुलेगा। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने जिस सामाजिक परिवर्तन और समानता की कल्पना की थी, उसे आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।
बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आसार
यतींद्र सिद्धारमैया के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज होने की संभावना है। भाजपा और उसके सहयोगी दल पहले भी हिंदू राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस नेताओं के बयानों की आलोचना करते रहे हैं। वहीं कांग्रेस का आधिकारिक रुख संविधान और भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा पर आधारित रहा है।
मंत्री के बयान को लेकर आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

