नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में मदद और तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल के अनुरोध पर भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सबसे पहले एक एडवांस रेक्की टीम भेजी जाएगी, जो मौके की स्थिति और जरूरी उपकरणों का आकलन करेगी। इसके साथ मेडिकल टीम भी भेजी जाएगी। भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और उन्हें स्थापित करने वाली तकनीकी टीम भेजने की भी पेशकश की है।
अब तक 84 भारतीय नागरिकों को बचाया गया
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 84 भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीय और तमिलनाडु के 21 नागरिक शामिल हैं। 63 भारतीयों को 27 अगस्त को बचाया गया था, जबकि तमिलनाडु के 21 नागरिकों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकालकर पहले काठमांडू लाया गया और शुक्रवार को वे दिल्ली पहुंच गए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 21 भारतीय नागरिकों के दिल्ली पहुंचने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात की। ये लोग नेपाल में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और बाढ़ के बाद प्रभावित इलाके में फंस गए थे।
63 भारतीय कर्मचारी कैसे बचाए गए?
त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे भारतीय कर्मचारियों समेत करीब 350 लोगों को नेपाली सेना ने सुरक्षित निकाला था। इनमें 63 भारतीय नागरिक थे। बाढ़ से प्रभावित इलाके में सड़क और दूसरी संपर्क व्यवस्थाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
भारत अब इसी तरह के जटिल बचाव अभियानों में नेपाल की मदद के लिए अपनी विशेष टनल रेस्क्यू क्षमता उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।
96 भारतीय चीन की तरफ से नेपाल पहुंचे
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से जमीन के रास्ते नेपाल पहुंच चुके हैं। अब उन्हें वहां से भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है। यानी इन्हें ‘बचाए गए 84’ के आंकड़े में अलग से जोड़ना सही नहीं होगा; ये नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंचने के बाद निकासी की प्रक्रिया में हैं।
इसके अलावा चीन की तरफ करीब 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। भारतीय दूतावास भी उनकी स्थिति पर नजर रख रहा है और स्थानीय अधिकारियों के साथ उनकी निकासी को लेकर समन्वय कर रहा है।
320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं
बाढ़ की भयावहता के बीच बड़ी चिंता उन भारतीय नागरिकों को लेकर है, जिनसे अभी संपर्क नहीं हो पाया है। विदेश मंत्रालय के शुक्रवार के अपडेट के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिक फिलहाल लापता या संपर्क से बाहर हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा स्थिर नहीं है और अलग-अलग सूचियों का मिलान तथा लोगों की स्थिति की पुष्टि जारी है।
इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के ऐसे लोग भी संपर्क से बाहर हैं, जिनके पास भारतीय नागरिकता नहीं बल्कि दूसरी राष्ट्रीयता है। इनमें ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। इसलिए इनका आंकड़ा 320 भारतीय नागरिकों के आंकड़े से अलग है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री
भारत ने राहत अभियान के तहत अब तक दो विमानों से 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। तीसरी खेप के बाद यह मात्रा करीब 60 टन हो जाएगी। तीसरे विमान में पोर्टेबल जनरेटर समेत नेपाल की मांग के अनुसार अन्य जरूरी राहत सामग्री भेजी जा रही है।
भारत ने इसके अलावा मेडिकल टीम, टनल रेस्क्यू टीम, बेली ब्रिज और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद की पेशकश की है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की टीम और उपकरण भेजने का प्रस्ताव भी नेपाल के सामने रखा गया है और भारत नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।
नेपाल में बचाव अभियान अभी जारी
नेपाल में बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में भारत की ओर से टनल रेस्क्यू, मेडिकल सहायता और अस्थायी पुलों की पेशकश का उद्देश्य बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों की संपर्क व्यवस्था बहाल करने में मदद करना है।
नोट: उपलब्ध ताजा विदेश मंत्रालय अपडेट के आधार पर 84 भारतीयों के बचाए जाने की पुष्टि होती है—63 त्रिशूली-1 परियोजना के कर्मचारी और 21 तमिलनाडु के नागरिक। 96 भारतीय चीन की तरफ से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ सुरक्षित बताए गए हैं। इन आंकड़ों को आपस में जोड़कर कुल ‘बचाए गए’ नागरिकों की संख्या बताना उचित नहीं होगा।
