क्या ISRO का निजीकरण होगा? कर्मचारियों की चिंता पर चेयरमैन वी. नारायणन ने दिया बड़ा जवाब, बताया असली प्लान

7 Min Read
क्या ISRO का निजीकरण होगा? कर्मचारियों की चिंता पर चेयरमैन वी. नारायणन ने दिया बड़ा जवाब, बताया असली प्लान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण की आशंकाओं के बीच चेयरमैन वी. नारायणन ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि ISRO का निजीकरण नहीं किया जा रहा है और इसकी भूमिका भी कम नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने संगठन के भविष्य, निजी कंपनियों को काम सौंपे जाने और कर्मचारियों की नौकरी व भविष्य को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।

दरअसल, 4 सितंबर को नौ कर्मचारी संगठनों ने ISRO चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखकर अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी और ISRO के विनिर्माण व संचालन से जुड़े कामों को निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की संभावित योजना पर सवाल उठाए थे। संगठनों ने मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका, भविष्य की भर्ती और ISRO के आगे के स्वरूप को लेकर स्पष्ट नीति बताने की मांग की थी।

ISRO चेयरमैन ने कहा- कर्मचारियों को नौकरी को लेकर चिंता की जरूरत नहीं

बेंगलुरु स्पेस एक्सपो के दौरान वी. नारायणन ने कहा कि ISRO एक सरकारी संगठन है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का उद्देश्य ISRO को कमजोर करना नहीं, बल्कि देश की कुल अंतरिक्ष क्षमता और स्पेस इकोसिस्टम को बड़े स्तर पर विकसित करना है।

उन्होंने यह भी समझाया कि भारत को आने वाले समय में मौजूदा क्षमता से कहीं अधिक संख्या में लॉन्च की जरूरत होगी। ऐसे में केवल सरकारी संगठन के स्तर पर उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक अवसर देना इसी विस्तार की रणनीति का हिस्सा है।

नारायणन के मुताबिक, जब कोई PSLV या GSLV मिशन होता है तो उसके निर्माण में भारतीय उद्योग पहले से ही बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि ISRO के साथ करीब 450 उद्योग काम कर रहे हैं और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बजट का बड़ा हिस्सा उद्योगों तक पहुंचता है। ISRO के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, भारत में 2020 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप और निजी कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अब 450 से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं।

फिर निजी कंपनियों को क्या काम मिलेगा?

यहीं इस पूरे विवाद को समझना जरूरी है। निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक भूमिका देना और ISRO का निजीकरण करना एक ही बात नहीं है।

ISRO ने 6 सितंबर को जारी अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में 2020 से शुरू हुए सुधारों और Indian Space Policy 2023 का उद्देश्य भारत में एक बड़ा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों को स्पेस वैल्यू चेन में अलग-अलग स्तरों पर भाग लेने का अवसर दिया जा रहा है।

ISRO का कहना है कि जिन तकनीकों को विकसित और परिपक्व किया जा चुका है, उनके बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायीकरण की जिम्मेदारी उद्योग उठा सकता है। इससे ISRO के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी नई तकनीक, अत्याधुनिक अनुसंधान और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

कर्मचारियों की चिंता क्यों बढ़ी?

कर्मचारी संगठनों की चिंता अचानक नहीं उठी। 21 अगस्त को IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने एक कार्यक्रम में कहा था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह काम निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां करेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि ISRO का ध्यान रिसर्च, नई तकनीक, वैज्ञानिक मिशन और ऐसी उन्नत क्षमताओं पर ज्यादा रहेगा, जिन्हें निजी क्षेत्र के लिए विकसित करना मुश्किल है।

इसके बाद ISRO के कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाया कि यदि रॉकेट और नियमित सैटेलाइट निर्माण जैसी गतिविधियां धीरे-धीरे उद्योगों को दी जाती हैं तो ISRO में मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी और भविष्य में नई भर्तियों का क्या होगा। संगठनों ने यह भी पूछा कि PSLV, LVM3 और अन्य अगली पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल के डिजाइन, विकास, परीक्षण और संचालन में ISRO की भविष्य की जिम्मेदारी क्या रहेगी।

SSLV से शुरू हो चुका है बदलाव

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी केवल प्रस्ताव तक सीमित नहीं है। SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) की तकनीक और उत्पादन से जुड़े अधिकार पहले ही Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। PSLV और LVM3 जैसे लॉन्च व्हीकल के उत्पादन को भी भविष्य में उद्योग की ओर ले जाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ISRO अंतरिक्ष अभियानों से बाहर हो जाएगा। ISRO के आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि उसका फोकस उन्नत अनुसंधान एवं विकास, नई पीढ़ी की तकनीक, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशन, अंतरिक्ष विज्ञान एवं अन्वेषण और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष क्षमताओं पर बना रहेगा।

Deep Space और रणनीतिक मिशन ISRO के पास

ISRO के मुताबिक उसकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता जिन क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण है, वहां उसकी भूमिका बनी रहेगी। इनमें अत्याधुनिक रिसर्च, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी की लॉन्च प्रणालियां, गहन अंतरिक्ष और ग्रहों के मिशन तथा रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताएं शामिल हैं।

ISRO ने यह भी स्पष्ट किया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षमताओं का स्वामित्व और नियंत्रण सरकार के पास ही रहेगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी सुरक्षा, गुणवत्ता, नियामकीय और राष्ट्रीय हित से जुड़े प्रावधानों के अधीन होगी।

सरकार का लक्ष्य क्या है?

पूरे बदलाव का व्यापक लक्ष्य भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को मौजूदा सरकारी ढांचे से आगे बढ़ाकर एक बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक इकोसिस्टम में बदलना है। सरकार और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े संस्थान चाहते हैं कि निजी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट, प्रणोदन, ग्राउंड सिस्टम, संचार और अन्य क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाएं।

ऐसे में फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ISRO के निजीकरण की बात सही नहीं है। बदलाव मुख्य रूप से इस बात का है कि ISRO द्वारा विकसित परिपक्व तकनीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक उपयोग निजी उद्योग कर सकता है, जबकि ISRO को भारत के सबसे जटिल, रणनीतिक और अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष मिशनों पर अधिक केंद्रित किया जाए।

Share This Article
Exit mobile version